राज्य चुनाव आयोग द्वारा मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव को निरस्त किए जाने के बाद मप्र के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायतों के संचालन को लेकर बड़ा फैसला किया है। इसके तहत अब ग्राम पंचायतों में बैंक खातों का संचालन पूर्व की तरह पंचायत सचिव और सरपंच के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाएगा।
इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया गया है।
यह व्यवस्था आगामी आदेश तक जारी रहेगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग यह प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव द्वारा 4 जनवरी को जारी किए गए आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि ग्राम पंचायतों के बैंक खातों का संचालन सचिव एवं ग्राम प्रधान शासकीय समिति के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाएगा इसी प्रकार जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत में भी प्रधान प्रशासकीय समिति पूर्व की भांति ही कार्य करते रहेंगे।
आपको बताए कि प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनावो के निरस्त होने के बाद शिवराज सरकार यह बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत अब पंचायतों में काम नहीं रुकेंगे और ग्राम पंचायतों में बैंक खातों का संचालन पंचायत सचिव और सरपंच के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाएगा।
प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने को लेकर अध्यादेश जारी करने के बाद ओबीसी आरक्षण को लेकर फंसे पेच में सरकार उलझ गई, जिसके बाद एक एक कर चुनाव को लेकर जारी किए गए आदेश रद्द करने का दौर शुरू हो गया। जहां पहले ओबीसी आरक्षण रद्द किया गया, बाद में रोस्टर प्रणाली से लागू किया गया परिसीमन,और उसके बाद चुनाव रदद् करने की घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा की गई, जिसके बाद नई मतदाता सूची बनाने, उसमें नए नाम जोड़ने और उस सूची का प्रकाशन करने के आदेश भी रद्द कर दिए गए ।
जिसके बाद अब त्रिस्तरीय पंचायतों के संचालन की व्यवस्था पूर्व की भांति किए जाने के आदेश जारी किए गए हैं। ऐसे में सूत्र बताते हैं कि इन सब प्रक्रिया को पुना: करने में करीब ढेड़ से 2 वर्ष का समय लग सकता है।जहा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाएगा।
सूत्रों की बातों पर यदि गौर किया जाए तो ऐसे में आगामी 2 वर्षों तक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने की संभावना नजर नहीं आ रही है।










































