अगर आप दूध पी रहे हैं, तो जरा संभल के। ये दूध नकली और मिलावटी हुआ तो आपको कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी भी हो सकती है। राजगढ़ में नकली दूध बनाने की फैक्टरी पकड़ी गई है। यहां खतरनाक केमिकल से दूध बनाया जा रहा था। नकली दूध फैक्टरी का संचालक ग्रेजुएट है। उसने दूध बनाने का तरीका यूट्यूब से सीखा है। मुनाफा भी 200% से ज्यादा था। इस दूध को वह प्लांट में खपाता था। दैनिक भास्कर टीम राजगढ़ से 15 किमी दूर खैरासी गांव पहुंची। युवक को आइडिया कहां से आया, कैसे नकली दूध तैयार किया। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट…
राजगढ़ से 15 किलोमीटर दूर खैरासी गांव। आबादी एक हजार 476। यहां करीब हर दूसरे-तीसरे घर में मवेशी हैं। गांव में तीन दूध डेयरी हैं। इनमें से एक डेयरी हेमराज (23) कारपेंटर चलाता है। हेमराज बीएससी पास है। गांव के लोग मवेशियों का दूध निकालकर यहां बेचते हैं। आसपास के ग्रामीणों से दूध खरीदने के बाद उसे एकत्रित कर प्लांट भेजा जाता है। हेमराज ने करीब 6 महीने पहले दूध डेयरी शुरू की थी। वह जल्दी अमीर बनना चाहता था। दूध डेयरी में ज्यादा मुनाफा नहीं मिलता था। अक्सर फ्री रहने पर वह यूट्यूब पर पैसे कमाने का तरीका खोजता रहता था।
एक दिन उसने यूट्यूब पर पैसे कमाने के लिए नकली दूध बनाने वाला वीडियो देखा। उसके मन में नकली दूध बनाने का आइडिया जम गया। दूध डेयरी होने से उसे यह आसान भी लगा। वह बाजार से नकली दूध बनाने के लिए कुछ केमिकल लेकर आया। पहली बार नकली दूध बनाया। हालांकि, पहली बार में दूध अच्छा नहीं बना। वह धीरे-धीरे प्रैक्टिस करता रहा। कुछ दिन में नकली दूध को मार्केट में सप्लाई कर दिया। दूध लेने वाले असली-नकली की पहचान तक नहीं कर पाए। इससे हेमराज की झिझक खत्म हो गई।
फिर क्या था, मुनाफा बढ़ने लगा। एक लीटर दूध बनाने में 20 रुपए का खर्च आता। इस दूध को वह 55 रुपए प्रति लीटर में बेचता था। यानी 200 प्रतिशत से ज्यादा मुनाफा कमाता था। इसके बाद हेमराज दिन में आसपास के ग्रामीणों से डेयरी पर दूध खरीदता। रात में केमिकल से नकली दूध बनाकर उस असली दूध के साथ नकली दूध को मिक्स कर राजगढ़ जिले में सप्लाई कर देता था। नकली दूध बनाने की शुरुआत 5 लीटर से हुई, जो कुछ दिन में ही 30 लीटर तक पहुंच गई। छह महीने के भीतर यह आंकड़ा 300 लीटर तक पहुंचा गया।
मुखबिर की सूचना पर प्रशासन ने की कार्रवाई
20 फरवरी को कलेक्टर हर्ष दीक्षित को सूचना मिली कि गांव में नकली दूध बनाने काम चल रहा है। उन्होंने खाद्य विभाग के जिला अधिकारी शिवराज पावक और तहसीलदार संजय चौरसिया को बुलाया। उन्होंने टीम बनाकर पुलिस के साथ मिलकर फैक्टरी पर दबिश देने के आदेश दिए।
अब जानते हैं कैसे कार्रवाई को अंजाम दिया
मंगलवार यानी 20 फरवरी की रात खाद्य विभाग, प्रशासन और पुलिस की टीम गांव पहुंची। चूंकि नकली दूध की फैक्टरी घर में संचालित थी। ऐसे में टीम घर से कुछ दूर रुक गई। अंधेरा होते ही रात करीब साढ़े 8 बजे अचानक टीम ने दबिश दी। पुलिसकर्मियों ने घर को चारों ओर से घेर लिया था। घर का गेट अंदर से बंद था। अंदर से कुछ आवाजें आ रही थीं। टीम ने घर का दरवाजा खटखटाया। भीतर से आ रही आवाजें आना बंद हो गईं। करीब 5 मिनट तक नॉक करने के बाद आखिरकार दरवाजा खुला। अंदर एक ही युवक मौजूद था। पूछने पर उसने अपना नाम हेमराज कारपेंटर बताया। हॉल से बाहर निकलने के लिए एक ही गेट था। इस कारण वह भाग नहीं सका।
टीम हॉल में दाखिल हो चुकी थी। नजारा देख टीम हैरान रह गई। यहां नकली दूध बनाने का काम चल रहा था। कमरे के किनारे भगोने में दूध बनकर तैयार था। इसके अलावा दूसरे बर्तन में भी बड़ी मात्रा में नकली दूध तैयार रखा था। हॉल से ही लगे कमरे में टीम दाखिल हुई, तो यहां कुछ केमिकल, दूध पावडर, डालडा, पाम ऑयल के डिब्बे, इलेक्ट्रिक मिक्सर ग्राइंडर समेत दूध बनाने के लिए उपयोग में आने वाली भट्टी, बर्तन समेत अन्य सामग्री रखी थी। टीम ने तैयार दूध को नापा, तो वह 300 लीटर निकला। टीम ने तैयार दूध के सैंपल लिए। इसे मौके पर ही नष्ट कर दिया। करीब एक घंटे तक चली कार्रवाई के बाद सारा सामान जब्त कर अवैध फैक्टरी को सील कर दिया गया।
आरोपी हेमराज कारपेंटर के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। एसपी अवधेश कुमार गोस्वामी ने आरोपी के खिलाफ रासुका लगाने की बात कही है










































