कोरोना महामारी में लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए रखे गए स्वास्थ्य कर्मीयो की सेवा समाप्ति के आदेश जारी किए गए है। जिसके चलते 2 वर्ष पूर्व अस्पताल में रखे गए स्वास्थ्य कर्मी अपनी सेवाएं अब आगे जारी नहीं रख सकेंगे।
यह आदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक प्रियंका दास ने जारी किया है। जिसमे उन्होंने प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टर्स और मुख्य चिकित्सा एवं स्यास्थ्य अधिकारी को इस विषय में पत्र भेजा है। शासन द्वारा जारी किए गए इस आदेश का असर कोरोना काल के दौरान जिले में अस्थाई तौर पर रखे गए 25 चिकित्सकों पर पड़ा है जिनकी 31 मार्च तक सेवाएं लेने के बाद 1 अप्रैल से सभी की सेवाएं समाप्त कर दी जाएगी
एनएचएम संचालक द्वारा जारी किए गए पत्र में उल्लेख किया है कि कोरोना की रोकथाम के लिए जिला स्तर पर अस्थाई मानव संसाधन रखने की स्वीकृति दी गई थी लेकिन अब अस्थाई मानव संसाधन पर खर्च होने वाले मासिक मानदेय के लिए बजट उपलब्ध नहीं हैं। जिसके चलते कोरोना महामारी में लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए रखे गए स्वास्थ्य कर्मीयो की 31मार्च तक सेवा लेने के पश्चात 1अप्रेल से उनकी सेवाए समाप्त मानी जाएगी।अतः भविष्य में इन्हें मासिक भुगतान नहीं किया जा सकेगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मनोज पांडेय ने बताया कि एनएचएम विभाग द्वारा एक पत्र जारी कर कोरोना कॉल में रखे गए चिकित्सकों की सेवाएं समाप्त किए जाने के आदेश दिए गए हैं। जिले में कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन टेक्नीशियन, अन्य स्टाफ सहित कुल 25 चिकित्सक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए रखे गए थे। जिनकी सेवा समाप्त की जाएगी। क्योंकि यह आदेश शासन द्वारा जारी किए गए हैं जिसका पालन कराया जा रहा है। जिसकी आदेश जिला स्तर से भी जारी किए जा चुके हैं।










































