35 गांव के किसान समर्थन मूल्य पर नही बेच पा रहे धान

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किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने और उन्हें बिचौलियों से बचने के लिए प्रतिवर्ष किसानों का उपार्जन समर्थन मूल्य पर सरकार द्वारा खरीदा जाता है। ताकि किसानों को फसल के वाजिब दाम मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा सके। इसी उद्देश्य के तहत जिले में 1 दिसंबर से किसानों की धान समर्थन मूल्य पर खरीदने का कार्य शुरू किया गया है। लेकिन तहसील बरसा के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण मड़ई और आसपास करीब 33 गावो के किसान अब भी अपनी धान समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पा रहे हैं। जहां मंड़ई में हर वर्ष की तरह इस वर्ष धान खरीदी का कार्य शुरू न होने के चलते किसान धान बेचने के लिए परेशान हो रहे हैं।जिसका फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि तहसील बिरसा के ग्राम मंड़ई में पिछले 25 वर्षों से सोसायटी समिति को केंद्र बनाकर धान उपार्जन का कार्य किया जाता था लेकिन पिछले वर्ष मंड़ई समिति में 19 लाख रुपए का गबन हुआ है। जिसके चलते इस वर्ष मंड़ई समिति को धान उपार्जन का कार्य नहीं दिया गया है वही इस वर्ष मंड़ई की जगह धान खरीदी का कार्य मोहगांव समिति को दिया गया है। जहां दूरी अधिक होने के चलते किसान अपना उपार्जन लेकर नहीं पहुंच रहे हैं। जिन्होंने पुनः मंड़ई समिति को केंद्र बनाए जाने की मांग की है। अपनी इस मांग को लेकर उन्होंने सोमवार को स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय में एक ज्ञापन सौपा है जिसमें उन्होंने मंड़ई समिति को केंद्र बनाकर धान उपार्जन का कार्य शुरू किए जाने की मांग की है। अपनी इस मांग को पूरी करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और किसानों ने प्रशासन को दो दिनों का अल्टीमेटम दिया है। जिन्होंने दो दिनों के भीतर मांग पूरी न होने पर चक्काजाम कर आंदोलन किए जाने की चेतावनी दी है।

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