4 महीना की खामोशी के बाद स्वयं को शिक्षकों का सबसे बड़ा हिमायती संघ बताने वाला आजाद अध्यापक संघ देश के महान क्रांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आजाद की 116 जयंती के बहाने सक्रिय होता दिखाई दे रहा है? हालांकि इस विषय पर चर्चा के दौरान आजाद अध्यापक संघ के जिला अध्यक्ष आशीष बिसेन बताते हैं कि उनके द्वारा हमेशा शिक्षक साथियों की मदद की गई है। अचानक 4 महीने बाद आजाद अध्यापक के सक्रिय होने पर शिक्षकों के बड़े समूह या कहे अधिकांश शिक्षकों के भीतर भीतर यही गुपचुप चर्चा चल रही है कि आजाद अध्यापक संघ गर्मियों की छुट्टी में कहां था? उनके पदाधिकारी कहां गुम हो गए थे? जब शिक्षकों को उनकी जरूरत थी तब सब खामोश थे? जुलाई का महीना शुरू होते ही आजाद अध्यापक संघ सक्रिय होने लगा।
बात करने की नहीं फुर्सत
दरअसल हम इस तरह की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि गर्मी की छुट्टी के दौरान जब शिक्षक परेशान थे उन्हें संघ की जरूरत थी तब यह आजाद अध्यापक संघ के बड़े-बड़े पदाधिकारी छुट्टी मना रहे थे। यहां तक कि मीडिया से बात करने की इतनी फुर्सत नहीं थी। पूरा मामला सीएम राइज स्कूल और अन्य परेशानियों से जुड़ा हुआ है?
गर्मी की छुट्टी बर्बाद
आप सभी और शिक्षक साथी भी जानते हैं कि किस तरह मध्यप्रदेश शासन ने शिक्षकों की इस गर्मी की छुट्टी को सीएम राइस के नाम कुर्बान कर दिया? या कहे कि बर्बाद कर दिया गया? कैसे बिना नियम बिना मेरिट सूची का पालन किए शिक्षकों को तानाशाही पूर्ण एकतरफा रिलीव कर दिया गया? कैसे शिक्षक परेशान हुए तहसील मुख्यालय जिला मुख्यालय से बाहर स्थानांतरण कर दिए गए? इस दौरान शिक्षक परेशान थे उन्हें याद आ रहा था तो अपना संघ लेकिन अपना संघ आजाद अध्यापक संघ तो गर्मी की छुट्टी मना रहा था। पदाधिकारी एसी की हवा में घरों में बैठे हुए थे क्योंकि सरकार गर्मी की छुट्टी की भी तनख्वाह फ्री में जो देती है?
शिक्षक होते रहे परेशान
इस दौरान शिक्षकों ने हमें सीएम राइज से जुड़ी हुई कई समस्याएं बताई हमने उसे उजागर किया, इस दौरान हमारे द्वारा भी जब आजाद अध्यापक संघ के बड़े-बड़े पदाधिकारियों जिला अधिकारियों से चर्चा करने की कोशिश की गई तो कोई भी फोन रिसीव करने तक तैयार नहीं था? या सीधे शब्दों में कहें कि कोई भी शिक्षकों की इस परेशानी सीएम राइस स्कूल के पचड़े में पडऩा नहीं चाहता था?
अब कैसी खामोशी
जिसे देखकर ऐसा लगा था कि शायद जिले के भीतर इस नाम का कोई संगठन है या नहीं या फिर समाप्त हो गया है, क्योंकि बात-बात पर शिक्षकों के अधिकार की लड़ाई लडऩे की बात करने वाला यह संगठन जब शिक्षकों को उसकी बहुत अधिक जरूरत थी उस दौरान खामोश बैठ गया था।
बैकफुट पर दिखा संघ
या कहे की सीएम राइज स्कूल के मामले में इस आजाद अध्यापक संघ ने आज तक 2 शब्द नहीं कहे, इसके पीछे क्या वजह है यह तो आजाद अध्यापक संघ के सदस्य ही जाने? क्योंकि अभी सीएम राइज का मुद्दा समाप्त नहीं हुआ है, वर्तमान परिदृश्य और शिक्षकों की परेशानी को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि शिक्षकों के पीछे सरकार लग गई है और आजाद अध्यापक संघ बैकफुट पर चला गया है?
शिक्षकों की सुनी समस्या- जिला अध्यक्ष
इस विषय पर चर्चा के दौरान आजाद अध्यापक संघ के जिला अध्यक्ष आशीष बिसेन में बताते हैं कि उनके संघ के द्वारा शिक्षकों की लगातार मदद की गई है रही बात सीएम राइज स्कूल में शिक्षकों के दूसरे जिले में ट्रांसफर होने की तो उनके द्वारा उन्हें कोर्ट भिजवाया गया जहां से उन्हें इस स्टे मिला। जिलाध्यक्ष आशीष बिसेन बड़े अच्छे से सफाई देते हुए बताते हैं कि यह सारे स्थानांतरण आयुक्त स्तर से हुए थे इसलिए उनके द्वारा प्रांत अध्यक्ष को पूरी जानकारी दी गई थी।










































