वारासिवनी(पद्मेश न्यूज)। आजाद अतिथि शिक्षक संघ वारासिवनी के द्वारा एसडीएम को महामहिम राष्ट्रपति भारत सरकार नई दिल्ली ,प्रधानमंत्री भारत सरकार नई दिल्ली ,महामहिम राज्यपाल मध्यप्रदेश शासन भोपाल ,मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन भोपाल ,मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय जबलपुर मध्यप्रदेश के नाम का ज्ञापन सौंपकर २ अक्टूबर को गाँधी जयंती के अवसर पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर रहे अतिथि शिक्षकों पर लाठीचार्ज करने वालो पर लाठीचार्ज जलियांवाला बाग जैसी घटना निंदनीय है । ज्ञापन में उल्लेखित है कि मध्यप्रदेश के अतिथि शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित करने हेतु २ सितंबर २०२३ को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महापंचायत में अनेक घोषणाएं की थीं। जिसमें कार्यनुभव और वरिष्ठता के आधार पर गुरुजियों की तर्ज विभागीय परीक्षा, वार्षिक अनुबंध, सीधी भर्ती में ५० प्रतिशत आरक्षण और बोनस अंक देकर नियमित करने की घोषणा की थी। किन्तु आवेदन निवेदन पर एक वर्ष बाद भी आज तक आदेश जारी नहीं हुए। उसके बाद १० सितंबर २०२४ को भोपाल में हजारों की संख्या में एकत्र होकर सांवेधानिक रूप से अपनी बात रखी गई थी। ११ सितंबर २०२४ को वल्लभ भवन मंत्रालय में शासन प्रशासन तथा अतिथि शिक्षक प्रतिनिधि मंडल के साथ बैठक हुई जिसमें कुछ तात्कालिक मांगों पर सहमति बनी थी। उसके बाद भी आदेश जारी नही होने पर पुन: बीस दिन बाद २ अक्टूबर २०२४ को प्रदेश भर के अतिथि शिक्षक शांतिपूर्ण तरीके से वचन निभाने का आग्रह भोपाल के तुलसी नगर अंाबेडकर पार्क सेकेंड स्टॉप पर कर रहे थे। जहाँ पुलिस प्रशासन ने रात्रि लगभग ८ बजे स्ट्रीट लाइट बंद करके बिना किसी चेतावनी के बर्बरता पूर्ण व्यवहार के साथ गाली गलौच करते हुये अतिथि शिक्षक भाई बहिनों पर लाठीचार्ज कर जमकर पिटाई की गई। जिसमें कई दर्जन अतिथि शिक्षकों को गंभीर चोटें आई है तथा प्रदेश अध्यक्ष के सी पवार, प्रदेश महासचिव संतोष कहार, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बी एम खान, प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश जोशी सहित अन्य २५० अतिथि शिक्षक शिक्षिकाओं पर झूठी एफआईआर दर्ज की गई है जो अत्यंत घोर निंदनीय घटना है। मध्यप्रदेश सरकार का ऐसा असहयोगात्मक रवैया से लाखों अतिथि शिक्षक परिवार सरकार के द्वारा की गई शर्मनाक घटना का खुला विरोध करते हैं। यदि एक सप्ताह के अंदर मध्यप्रदेश पुलिस प्रशासन भोपाल ने झूठी एफ आईआर तत्काल वापस नहीं नहीं ली गई तो हम संपूर्ण मध्य प्रदेश में आमरण अनशन और जेल भरो आंदोलन करने पर मजबूर हो जाएंगे। जिसकी संपूर्ण जवाबदारी शासन और प्रशासन की होगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक मौजूद रहे।
यह है अतिथि शिक्षकों की मांग
हमारी मांग है कि कार्यानुभव और वरिष्ठता के आधार पर मध्यप्रदेश के अतिथि शिक्षकों का बारह माह का सेवाकाल और पद स्थायित्व ६ वर्ष की उम्र तक किया जायें। वहीं तत्काल मध्यप्रदेश पुलिस प्रशासन के द्वारा स्ट्रीट लाइट बंद कर बिना किसी चेतावनी के अतिथि शिक्षक शिक्षिकाओं पर बर्बरता व्यवहार के साथ गाली गलौच करते हुए किया गया लाठी चार्ज की उचित प्रशासनिक जाँच के साथ दोषियों पर कार्यवाही की जायें। प्रदेश अध्यक्ष केसी पवार, प्रदेश महासचिव संतोष कहार, प्रदेशकार्यकारी अध्यक्ष बी एम खान, प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश जोशी के साथ ही अन्य २५० अतिथि शिक्षक शिक्षिकाओं पर की गई झूठी एफ आईआर तत्काल वापिस ली जायें।
अतिथि शिक्षकों पर चली लाठी के विरोध में एसडीएम को सौंपा ज्ञापन-संजय राणा
ब्लॉक अध्यक्ष संजय राणा ने बताया कि २ अक्टूबर भोपाल पार्क में आंदोलन हुआ जिसमें पुलिस ने लाइट बंदकर अतिथियों पर लाठी चलाई। वह महा पंचायत की घोषणा को लेकर आंदोलन कर रहे थे। जिसे लागू करवाने के लिए अतिथि शिक्षक शिक्षिकाओं के द्वारा शांतिपूर्वक आंदोलन कर शांति पाठ हनुमान चालीसा कर रहे थे। तभी लाइट बंद कर अतिथि शिक्षिको के साथ ऐसी मार पीट की गई जैसा जलियांवाला बाग बना दिया गया। अतिथि शिक्षकों पर लाठी चली इसके विरोध में हम एसडीएम को ज्ञापन देकर मांग कर रहे हैं। कि ऐसी घटना की पुर्नवृत्ति ना हो वहां पर महिला पुरुष सभी को मारा गया है और जो एफ आईआर की गई है वह वापस लेकर पुलिस के जिम्मेदार लोगों पर कार्यवाही की जायें।
अतिथि शिक्षकों पर की गई लाठी के विरोध में हम सब घोर निंदा करते है-पेमेंद्र पारधी
पेमेंद्र पारधी ने बताया कि भोपाल में गांधी जयंती पर अहिंसा आंदोलन था शांति के साथ हनुमान चालीसा का पाठ सरकार को सद्बुद्धि देने किया जा रहा था। ताकि हमारी मांगों को न्यायोचित तरीके से पूरी किया जाए । किंतु रात्रि में लाइट बंद कर मारपीट की गई इसकी हम निंदा करते हैं। एक शिक्षक छात्र को ऊपर उठाने के लिए काम करता है उसके साथ ऐसी पिटाई की गई है उसकी हम निंदा करते हैं। वह जो पुलिस वालों ने मारपीट किया हैं वह जिस मुकाम पर है उसमें भी किसी ना किसी शिक्षक का हाथ है। २५० अतिथि शिक्षकों पर जो अपराध दर्ज किया गया है वह वापस लेने के लिए हम मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को ज्ञापन दिया है।
सरकार की लगत नितियों के शिकार बने अतिथि शिक्षक- प्रीति देशमुख
प्रीति देशमुख ने बताया कि अतिथि शिक्षकों के द्वारा भोपाल में आंदोलन करते हुए अतिथि शिक्षक का पद १२ माह के लिए स्थाई हो जैसा कोई शासकीय शिक्षक आने पर अतिथि शिक्षक को हटा दिया जाता है वह नहीं होना चाहिए। ३० प्रतिशत रिजल्ट पर जो अतिथि शिक्षकों को नहीं दिया गया है उनके लिए धरना आंदोलन किया जा रहा था। हमारे जैसे कई लोग हैं जिन्होंने १५ वर्ष से पढ़ा रहे हैं आज उन्हें हटा दिया गया है। किस प्रकार नियमित को लेकर हमारी मांगे थी जिसे पूरा करने और अपने हक की लड़ाई लडऩे के लिए हम स्वतंत्र है । परंतु इस दौरान जो सरकार ने कदम उठाई वह बहुत गलत है ठीक नहीं है।










































