बालाघाट जिले के कटंगी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नांदी मोहगांव में 13–14 सितंबर 2025 की दरमियानी रात घटित हुए निर्मम दोहरे हत्याकांड ने पूरे अंचल को झकझोर कर रख दिया था। प्रतिष्ठित हार्डवेयर व्यापारी हेमेंद्र बिसेन 48 और उनकी पत्नी योगिता बिसेन 45 की उनके ही घर में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी।घटना के पाँच महीने बीत जाने के बावजूद पुलिस आज तक हत्यारों तक नहीं पहुँच सकी है। नतीजतन यह जघन्य वारदात अब अंधे हत्याकांड की श्रेणी में शामिल होती जा रही है।
खून से सना था बेडरूम- बेहद निर्मम तरीका
घटना की सुबह जब घर का दरवाज़ा नहीं खुला, तब उन कमरे में सो रहे परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई और उन्होंने कमरा में जाकर देखें और दंग रह गये उन्होंने कमरे के अंदर दोनों पति-पत्नी की लाश देखी। सूचना पर पहुँची पुलिस को बेडरूम में खून से लथपथ शव मिले।हेमेंद्र बिसेन का शव फर्श पर पड़ा था।योगिता बिसेन का शव बिस्तर पर मिला।जाँच में सामने आया कि दोनों पर किसी भारी और धारदार हथियार, संभवतः कुदाल या इसी प्रकार के औज़ार से ताबड़तोड़ वार किए गए थे। सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें इस बात की गवाही देती हैं कि हत्या बेहद नृशंस और सुनियोजित तरीके से की गई।
लूट नहीं-तो मक़सद क्या
घटना स्थल से किसी बड़े लूटपाट के स्पष्ट संकेत नहीं मिले। घर में रखे कई कीमती सामान सुरक्षित पाए गए थे।जिससे लूट की नीयत से हत्या नहीं की गई।इससे सवाल उठता है,क्या हत्या पुरानी रंजिश का नतीजा थी।क्या व्यापारी दंपत्ति को पहले से जानने वाले किसी व्यक्ति ने निशाना बनाया या फिर मामला किसी आर्थिक या राजनीतिक दबाव से जुड़ा था।
एसआईटी भी नाकाम-जाँच ठंडे बस्ते में
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जाँच दल(एस.आई.टी.) का गठन किया। टीम ने लगभग एक माह तक जाँच की—संदिग्धों से पूछताछ,कॉल डिटेल्स खंगाली गईं।आसपास के इलाकों में छानबीन की लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा। अब हालात ऐसे हैं कि इस हत्याकांड की जाँच धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।
राजनीतिक हस्तक्षेप या हाईप्रोफाइल कनेक्शन
सबसे बड़ा सवाल यही है कि—क्या यह मामला राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते दबा दिया गया या फिर किसी हाईप्रोफाइल व्यक्ति की संलिप्तता के कारण जाँच आगे नहीं बढ़ पाई।स्थानीय लोगों में यह चर्चा आम है कि पुलिस की सुस्ती सामान्य नहीं है। एक प्रतिष्ठित व्यापारी दंपत्ति की हत्या के बाद भी यदि आरोपी बेखौफ घूम रहे हैं। तो यह कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश
मृतकों के परिजन आज भी न्याय की आस लगाए बैठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि दबाव नहीं बनाया गया।तो यह मामला भी अन्य अंधे हत्याकांडों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा।
बिसेन दंपति हत्याकांड-पुलिस की कार्य प्रणाली पर एक तमाचा
नांदी मोहगांव का यह दोहरा हत्याकांड न सिर्फ एक परिवार का विनाश है।बल्कि पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी करारा तमाचा है।
जब तक-निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच उच्च स्तरीय निगरानी और जवाबदेही तय नहीं की जाती।
तब तक यह सवाल ज़िंदा रहेगा कि बालाघाट पुलिस आखिर कब तक अंधे हत्याकांडों का खुलासा करने में नाकाम रहती रहेगी।









































