निर्माणाधीन रेलवे ब्रिज के नीचे यातायात से बिगड़े हालात

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बालाघाट/
नगर से समीप वारासिवनी रोड स्थित गर्रा रेलवे क्रॉसिंग पर निर्माणाधीन रेलवे ब्रिज के नीचे उस समय स्थिति अत्यंत भयावह हो गई। जब अचानक मोटरसाइकिल के साथ-साथ चौपहिया वाहनों का आवागमन बढ़ गया। देखते ही देखते रेलवे ब्रिज के दोनों छोर पर वाहनों का भारी जमावड़ा लग गया, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।

गौरतलब है कि 10 दिन पूर्व 28 जनवरी से रेलवे ब्रिज पर गटर लॉन्चिंग कार्य के चलते पुलिस विभाग द्वारा नई एडवाइजरी जारी की गई थी। इसके अंतर्गत निर्माणाधीन रेलवे ब्रिज के नीचे से सभी प्रकार के वाहनों के आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था और वैकल्पिक मार्गों का निर्धारण किया गया था।एडवाइजरी के अनुसार नगर के समीप से गुजरने वाले डेंजर बायपास रोड से छोटे व बड़े वाहनों के आवागमन के निर्देश दिए गए थे। जबकि भारी वाहनों को फोरलेन मार्ग से आने-जाने के निर्देश जारी किए गए थे। प्रारंभिक दिनों में यह यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित भी हो रही थी।हालांकि बीते दो दिनों से स्थिति में अचानक बदलाव देखने को मिला। पहले निर्माणाधीन रेलवे ब्रिज के नीचे से केवल दोपहिया वाहन (मोटरसाइकिल) को आवागमन की अनुमति दी गई।जबकि चौपहिया वाहनों पर रोक बनी रही। लेकिन 9 फरवरी की रात्रि को चौपहिया वाहनों का भी इसी मार्ग से आवागमन शुरू हो गया।जिससे हालात तेजी से बिगड़ गए। जैसे ही वाहन चालकों को निर्माणाधीन रेलवे ब्रिज के नीचे से आवागमन की सूचना मिली। उन्होंने डेंजर बायपास रोड के बजाय अपने वाहनों को सीधे रेलवे ब्रिज की ओर मोड़ दिया। परिणामस्वरूप ब्रिज के दोनों ओर सैकड़ों वाहन फंस गए और लंबा जाम लग गया।निर्माणाधीन रेलवे ब्रिज के नीचे इस प्रकार का अव्यवस्थित यातायात बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। कार्य स्थल पर निर्माण सामग्री सीमित स्थान और भारी वाहनों की मौजूदगी के चलते दुर्घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों का कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा निर्माणाधीन रेलवे ब्रिज के नीचे से यातायात प्रारंभ किया गया है।तो वहां पुलिस कर्मियों की स्थायी तैनाती अनिवार्य की जानी चाहिए। यातायात पुलिस की मौजूदगी से न केवल वाहनों का सुचारू आवागमन संभव होगा। बल्कि किसी भी अप्रिय घटना से भी बचा जा सकेगा।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर स्थिति पर कब और कैसे ठोस कदम उठाते हैं। ताकि आम जनता को राहत मिल सके और निर्माण कार्य भी सुरक्षित रूप से जारी रह सके।

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