पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। वारासिवनी क्षेत्र के जहां नहर नहीं पहुंच पाई है या नहर होने के बाद भी पानी नहीं पहुंच पा रहा है वहां के किसान बिजली और खाद की समस्या से बहुत ज्यादा परेशान है। वर्तमान में खार एवं फ सल सूखने की कगार पर पहुंच गई है जहां पानी की फ सल को नितांत आवश्यकता बनी हुई है। परंतु इस समस्या पर सिंचाई विभाग बिजली विभाग कोई ध्यान नहीं दे रहा है,तो वही खाद में यूरिया किसानों को नहीं मिल रहा हैं। जिसको लेकर किसानों में शासन प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है तो वहीं मासिक बिजली बिल से किसानों के लाभ पर भी असर पढ़ रहा है। इसी के साथ सौर्य ऊर्जा का भी कनेक्शन किसानों को समय पर नही मिलने से वह बेहद परेशान है। जिसको लेकर किसानों के द्वारा हो रही समस्या को देखते हुए १५ फ रवरी के बाद आंदोलन की तैयारी की जा रही है। जिनके द्वारा समय रहते व्यवस्था में सुधार करने की मांग शासन प्रशासन से की गई है।
खाद, बिजली, सौर्य ऊर्जा, बिल देने किसान कर रहे मांग
वारासिवनी क्षेत्र कृषि प्रधान है जहां सर्वाधिक किसान निवास करते हैं इनकी आर्थिक व्यवस्था कृषि पर आधारित है। जहां इन्हें वर्तमान में काफ ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। खेती में सरकार ने १० घंटे बिजली देने की बात कही थी परंतु वर्तमान में ५ घंटे ही बिजली प्राप्त हो रही है और रात्रि में ५ घंटे भगवान भरोसे है। तो वहीं किसानों को पहले १ साल में ३००० रुपये बिजली का खर्च लगता था परंतु अब हर महीने बिल दिया जा रहा है जो ३००० से अधिक का आ रहा है। इसी के साथ परमानेंट बिजली कनेक्शन वालें किसानों के द्वारा शौर्य ऊर्जा के लिए आवेदन किया गया है। किंतु उन्हें कनेक्शन नहीं दिया जा रहा है टेंपरेरी कनेक्शन लेने के बाद कनेक्शन देने की बात कही जा रही है। जिसमें किसानों को विद्युत विभाग में करीब १५००० रुपये तक देने पड़ रहे हैं। गेहूं की फसल में यूरिया के नितांत आवश्यकता है जिसके लिए खाद के रूप में यूरिया किसानों को मिल नहीं पा रहा है। वहीं सिंचाई विभाग के द्वारा कई ऐसे किसान है जिनसे पानी का पैसा लिया जाता है ,परंतु नहर के माध्यम से उनके खेतो तक पानी आने के लिए नहर तो बनी है परंतु वह टूट फु ट होने झाडिय़ां और गंदगी भर गयी हैं। जिसके कारण पानी नहीं आ पा रहा है जिसकी मरम्मत भी सिंचाई विभाग के द्वारा नहीं की गयी हैं। किसानों के खेतों में पानी पहुंचाने पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसी कई प्रकार की समस्याओं को लेकर किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। क्योंकि वर्तमान में उनकी फ सल एवं खार पानी की कमी से सूखने की कगार पर पहुंच गई है। जिसको लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है, उनके द्वारा लगातार विभिन्न कार्यालय के चक्कर लगाये जा रहे हैं। परंतु कहीं उन्हें समाधान नहीं मिल पा रहा है ऐसे में किसान हताश और प्रताडि़त होने के बाद एकजुट होकर आगामी समय में आंदोलन धरना प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। ताकि वह सरकार तक अपनी बातों को पहुंचा सके । ऐसे में किसानों के द्वारा शासन प्रशासन से १५ फ रवरी के पूर्व उक्त व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने किसानों को बिजली सौर ऊर्जा कनेक्शन खाद और बिजली बिल देने की मांग की जा रही है।
सरकार ने कहा था किसानों को १० घंटे बिजली देंगें लेकिन मिल नही रही है- रामकृष्ण कावरे
किसान रामकृष्ण कावरे ने बताया कि ५ घंटे बिजली आ रही है रात में यह बिजली देते नहीं है। हमने जाकर खेतों में भी देखा है तो मोटर बंद रहती है समस्या ऐसी है कि पानी ही नहीं हो पा रहा है। १० घंटे तो भी इन्हें बिजली देना चाहिए खेती में पर्याप्त पानी नहीं हो रहा है। हमारी खार सूख रही है परहा तो नामुमकिन लग रहा है। यह हमारे साथ ही नहीं हमारे क्षेत्र के सभी किसानों के साथ है। कई परहा सूख गए हैं शिकायत तो हमने नहीं की किंतु बताए थे अब किसानों को संगठित कर आंदोलन ही करना पड़ेगा। क्योंकि जीतने की लागत नहीं उतने का तो बिजली बिल आ रहा है हर महीने ४००० आ रहा है । अब हर महीने इतना बिजली बिल हम देंगे तो लागत से ज्यादा बिजली बिल होगा हमको बचेगा कुछ नहीं।
किसानों की समस्या का समाधान नही हुआ तो करेंगें आंदोलन-सुभाष पारधी
किसान संगठन अध्यक्ष सुभाष पारधी ने बताया कि सरकार ने १० घंटे बिजली देने कहा तो दिन में ५ घंटे रात में ५ घंटे देंगे कहते हैं। दिन में ४ घंटे ही लाइट मिलती है रात का पक्का है नहीं दिए तो ५ घंटा बस हमने खेतों में जाकर देखा है रात में लाइट नहीं रहती। खेती सूखने की कगार पर आ गई है धान और गेहूं लगा हुआ है। खाद नहीं मिल रहा है डीएपी और सुपर फ ास्फेट कही कही है यूरिया कहीं नहीं है गेहूं में यूरिया की जरूरत है। किसान अब आंदोलन की कगार पर है हमारा कहना है कि बिजली १० घटा दो पर लगातार दो ५ घंटे देते हैं पानी सूख जाता है फि र रात में आया नहीं आया सब बराबर हो जाता है। सौर्य ऊर्जा का कनेक्शन परमानेंट कनेक्शन को नहीं दे रहे हैं टेंपरेरी लेने बोल रहे हैं एक कनेक्शन लेने जाए तो १५००० रूपये लगता है। अब हर किसी को टेंपरेरी लेना होगा पहले १ साल में दो बार १५०० यानी ३००० बिजली का खर्च लगता था और अब सामान्य रहा तो ३००० नहीं तो ७००० रुपये भी बिजली बिल आ रहा है। सभी किसानों की आपस में चर्चा चल रही है यदि ऐसा ही रहा तो १५ फ रवरी के बाद आंदोलन होगा।








































