MP Dacoity Case: धार जिले के धरमपुरी थाने में डकैती के एक मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। पुलिस ने 10-12 आरोपियों की वारदात को 4 लोगों का बताकर खात्मा रिपोर्ट 7 साल तक दबाए रखी, जिस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।धार: जिले में खाकी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। धरमपुरी थाने की पुलिस ने डकैती जैसे संगीन मामले में अपराधियों को बचाने के लिए जो खेल खेला, उसने अदालत को भी सन्न कर दिया। कोर्ट ने इस पूरी कार्रवाई को पुलिस विभाग के दामन पर एक बड़ा कलंक करार दिया है और तत्कालीन जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं। यह पूरा मामला 16 दिसंबर 2017 की रात का है, जब टवलाई गांव में व्यापारी शंकरलाल जायसवाल के घर पर 10-12 सशस्त्र डकैतों ने धावा बोला था और नकदी व जेवरात लूट ले गए थे।
इस तरह जांच की दिशा भटकाई गई
मामले की जांच कर रहे तत्कालीन थाना प्रभारी कुशलसिंह रावत और विवेचक एएसआई प्रकाश सरोदे ने इस गंभीर वारदात को महज 4 आरोपियों तक सीमित कर दिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 31 मार्च 2018 को तैयार की गई खात्मा रिपोर्ट को थाने में ही दबाकर रखा गया और इसे 7 साल बाद 26 अप्रैल 2025 को अदालत में पेश किया गया। अदालत में सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि विवेचक ने एफआईआर की भाषा को ज्यों का त्यों केस डायरी में उतार दिया, जबकि मौके पर मारपीट का शिकार हुई व्यापारी की पत्नी तक के बयान दर्ज नहीं किए गए। यहां तक कि डॉक्टर की एक्स-रे की सलाह को भी नजरअंदाज कर दिया गया।कोर्ट की सख्त टिप्पणी और आगे की कार्रवाई
धरमपुरी के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विवेक जैन की अदालत ने इस मामले में तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा कि यह जांच किसी कानूनी प्रावधान से नहीं बल्कि ‘पीएसपीसी’ और ‘केआरपीसी’ के तहत चलाई गई प्रतीत होती है। अदालत ने एसपी धार को पत्र लिखकर एक महीने के भीतर दोनों पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि यदि विभाग कार्रवाई नहीं करता है, तो अदालत खुद एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। साथ ही, अब इस मामले में नए विवेचक की नियुक्ति कर हर 30 दिन में प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।










































