Rock Shelters: मध्य प्रदेश के अलीराजपुर में 4000 हजार साल पुरानी पेंटिंग्स मिली है। रॉक पेंटिंग में कई अद्भुत चीजें हैं। इनमें हाथ की छाप और बैल की आकृति भी है। पुरातत्वविदों का कहना है कि इससे पश्चिमी एमपी की संस्कृति और समृद्ध होती है।अलीराजपुर: मध्य प्रदेश के पुरातत्वविदों ने अलीराजपुर जिले के वाव गांव में दो प्राचीन रॉक शेल्टर खोजे हैं। इनमें मिली पेंटिंग्स 3500 से 4000 साल पुरानी मानी जा रही हैं। इन पेंटिंग्स में घुड़सवार, आपस में जुड़े पांच बिंदु डिजाइन, हाथ की छाप और संभवतः एक बैल की आकृति दिखाई देती है।काफी समृद्ध कर सकता है समझ
पुरातत्व आयुक्त अभय बेडेकर ने कहा कि वन क्षेत्रों में व्यापक सर्वे के जरिए रॉक पेंटिंग्स और पाषाण युग के औजारों का मिलना, इस क्षेत्र के प्रौगैतिहासिक इतिहास के बारे में हमारी समझ को काफी समृद्ध कर सकता है।
कट्टीवाड़ा तहसील में मिली पेंटिंग्स
उज्जैन के त्रिवेणी संग्रहालय के क्यूरेटर योगेश पाल ने कट्टीवाड़ा तहसील में इन पेंटिंग्स की खोज की। इनकी सबसे खास बात यह है कि छोटे-छोटे बिंदुओं को जोड़कर बनाई गई पांच ज्यामितीय आकृतियां हैं।
अनुष्ठान से हो सकता है संबंध
साथ ही एक सीधी रेखा में बनी है, जिनमें से एक आकृति 42 सेमी ऊंची और 50 सेमी चौड़ी है। इनकी बनावट से संकेत मिलता है कि इनका संबंध किसी अनुष्ठान से हो सकता है।
घुड़सवार भी दिख रहे
वहीं, पाल ने बताया कि मुख्य चट्टान पर, पतली लकीरों जैसी आकृतियों में दो घुड़सवार दिखाई देते हैं। मुख्य घुड़सवार 14 सेमी गुना 16 सेमी का है। उसके पीछे कई अन्य घुड़सवार एक-दूसरे के ऊपर बने हुए हैं। 11 सेमी गुणा 15 सेमी आकार की हाथ की एक छाप, इस प्राचीन गैलरी में इंसानी मौजूदगी का अहसास कराती है। इसके साथ ही चट्टान के निचले हिस्से पर 33 सेमी गुणा 10 सेमी आकार की एक धुंधली आकृति है, जो संभवतः एक बैल की हो सकती है।
पश्चिमी एमपी को एक नई पहचान
गौरतलब है कि घुड़सवारों, ज्यामितीय डिजाइनों, हाथ की छाप और जानवरों की आकृतियों का यह संयोजन पश्चिम मध्य प्रदेश के पुरातात्विक रिकॉर्ड में एक महत्वपूर्ण नया स्थल जोड़ता है। अलीराजपुर अपनी भील विरासत, कला और शिल्प के लिए जाना जाता है। अब और अधिक हेरिटेज पर्यटकों को आकर्षित करता है, जिससे यहां पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।










































