रीवा में गोशाला के नाम पर 37.85 लाख का घोटाला, EOW के रडार पर आए पूर्व इंजीनियर और सप्लायर, भ्रष्टाचार का मामला दर्ज

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Rewa Cowshed Scam: रीवा जिले में मनरेगा योजना के तहत बनने वाली गोशाला में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। 37.85 लाख रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में जमीन पर काम हुए बिना ही 20.22 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया।रीवा: जिले से भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां मनरेगा योजना के तहत निराश्रित मवेशियों को आश्रय देने के लिए स्वीकृत की गई गोशाला के निर्माण में बड़ा खेल किया गया। कागजों पर लाखों रुपये खर्च दिखा दिए गए, जबकि धरातल पर गोशाला का नामोनिशान तक नहीं मिला। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इंजीनियरों और ठेकेदार समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह पूरा मामला रीवा जिले के दभौरा इलाके का है, जहां गोशाला निर्माण के नाम पर भारी अनियमितताएं बरती गईं।

क्या था प्रोजेक्ट और कहां मिली गड़बड़ी?

अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के तहत गोशाला, बछड़ा शेड, चारा स्टोर, बीमार मवेशियों के लिए शेड, बोरवेल, 6,000 लीटर की पानी की टंकी, बाउंड्री वॉल और जमीन समतल करने का काम शामिल था। इस योजना के लिए 37.85 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। हालांकि, जब EOW ने इस मामले की जांच की और भौतिक सत्यापन किया, तो वहां केवल 80 बाई 25 फीट की एक आंशिक रूप से बनी हुई बाउंड्री वॉल और एक अधूरा ढांचा मिला, जो उपयोग के लायक भी नहीं था। शेड, बोरवेल और पानी जैसी आवश्यक सुविधाएं पूरी तरह गायब थीं।टेंडर प्रक्रिया में बरती गई भारी अनियमितताएं

EOW की जांच में खुलासा हुआ कि ग्रामीण इंजीनियरिंग सेवा के अधिकारियों ने एक खास सप्लायर, छतरपुर के दीनदयाल कुशवाहा को फायदा पहुंचाने के लिए खुली टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया। आरोप है कि एक ही काम के लिए 3 और 31 दिसंबर 2020 की तारीख वाले दो कथित फर्जी शॉर्ट-टेंडर दस्तावेज तैयार किए गए थे।

न तो टेंडर डॉक्यूमेंट की फीस जमा की गई और न ही बयाना राशि दी गई। सप्लायर ने 28 सामग्रियों के बजाय केवल 9 सामग्रियों की अधूरी रेट लिस्ट जमा की थी। इसके बावजूद अधिकारियों ने एक तुलनात्मक बयान तैयार कर उसी फर्म को सबसे कम बोली लगाने वाला घोषित कर दिया और वर्क ऑर्डर जारी कर दिया।

बिलिंग में भी हुआ बड़ा गोलमाल

जांच एजेंसी के अनुसार, मनरेगा पोर्टल पर कुल 27.38 लाख रुपये के बिल अपलोड किए गए थे, जिनमें से 20.22 लाख रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है। धरातल पर काम न होने के बावजूद सरकारी खजाने से यह राशि निकाल ली गई।

इन लोगों पर हुई कार्रवाई

EOW ने इस मामले में छह लोगों को नामजद किया है:

  • पूर्व कार्यकारी अभियंता: राजेंद्र सिंह धुर्वे, डी.एस. अर्मो और हिमांशु तिवारी
  • पूर्व उप-विभागीय अधिकारी: जगदीश सिंह राजपूत
  • पूर्व सहायक ग्रेड-III कर्मचारी: लक्ष्मण प्रसाद शुक्ला
  • सप्लायर: दीनदयाल कुशवाहा

इन सभी पर आईपीसी की धाराओं के तहत आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। मामले में आगे की जांच जारी है

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