मध्य प्रदेश के नौ जिलों में हरियाली के साथ किसानों के चेहरे पर आएगी खुशहाली

0

सूखे की मार झेलने वाले बुंदेलखंड के लिए केन-बेतवा लिंक परियोजना वरदान से कम नहीं है। इससे नौ जिलों में हरियाली के साथ-साथ किसानों के चेहरे पर खुशहाली भी आएगी। 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। किसान दो से तीन फसलें ले पाएंगे। इससे न सिर्फ उनकी आय में वृद्धि होगी बल्कि विकास के नए द्वार भी खुलेंगे। आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। पेयजल संकट से भी क्षेत्र को निजात मिलेगी।

केन-बेतवा लिंक परियोजना को शुरुआत से ही बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास की दिशा में मील के पत्थर के तौर पर देखा जाता रहा है लेकिन जल बंटवारे के विवाद में यह महत्वाकांक्षी योजना लंबित थी। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के दायरे में पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन जिले आएंगे। खासतौर पर बुंदेलखंड के जिलों में पानी की बड़ी समस्या है। इससे औद्योगिक विकास भी नहीं हुआ।

खेती की बारिश पर निर्भरता के कारण किसान उन्न्ति नहीं कर पाए। उद्यानिकी फसलों का भी विस्तार नहीं हो पाया। जबकि, महाकोशल, मालवा और निमाड़ क्षेत्र के किसान सालभर में दो या तीन फसलें ले रहे हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति तो सुधर ही रही है, क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं। परियोजना से सिंचाई क्षमता का जो विस्तार होगा, उससे किसानों के चेहरों पर खुशहाली आएगी। पानी की उपलब्धता से ग्रीष्मकालीन फसलें होंगी, जो किसानों को आर्थिक तौर पर समृद्ध करेगी। अभी आमतौर पर किसान कम सिंचाई वाले बीज का उपयोग करते हैं, अब वे नई किस्मों की ओर रुख करेंगे।

पूर्व कृषि संचालक डॉ. जीएस कौशल का कहना है कि फसलों के लिए पानी मूल तत्व है। जब तक सिंचाई की सुविधा नहीं होगी, तब तक दूसरी गतिविधियां भी नहीं बढ़ेंगी। बुंदेलखंड क्षेत्र में तालाब और कुएं थे लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि पूरा क्षेत्र गंभीर जल संकट का सामना करने लगा। कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हुआ और बड़ी संख्या में पलायन होने लगा।

केन-बेतवा लिंक परियोजना से निश्चित तौर पर स्थितियां बदलेंगी। किसान दो-तीन फसल ले पाएंगे और पशुपालन, मत्स्य पालन सहित अन्य गतिविधियां बढ़ेंगी, जिसका असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। पलायन भी रुकेगा क्योंकि इसका सबसे बड़ा कारण क्षेत्र में उद्योग-धंधों की कमी है। सरकार को अब फसल चक्र पर ध्यान देना होगा। किसानों को समझाना होगा कि सिंचाई सुविधा का लाभ वे किस तरह से ले सकते हैं।

डूब में आएगी नौ हजार हेक्टेयर भूमि

परियोजना से छतरपुर-पन्न्ा जिले में लगभग नौ हजार हेक्टेयर भूमि डूब में आएगी। इसमें 4,141 हेक्टेयर कोर क्षेत्र को मिलाकर कुल 5,558 हेक्टेयर वन क्षेत्र है। पन्ना टाइगर रिजर्व का बड़ा हिस्सा भी डूब में आ रहा है।

दौधन में बनेगा बांध

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि केन नदी पर दौधन में बांध बनेगा। 77 मीटर ऊंचे इस बांध का जलग्रहण क्षेत्र 19,633 वर्ग किलोमीटर रहेगा और पानी भंडारण क्षमता 2,684 मिलियन क्यूबिक मीटर होगी। यहां दो पावर हाउस बनेंगे। 1.9 किलोमीटर लंबी अपर लेवल और 1.1 किलोमीटर लंबी लोअर लेवल टनल बनेगी। बेतवा कछार में तीन परियोजनाएं बनेंगी। इससे प्रदेश में 2.06 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता निर्मित होगी।

मप्र के 42 लाख लोगों को मिलेगी पेयजल सुविधा

मप्र को परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यहां के 42 लाख लोगों के लिए पीने के पानी का इंतजाम होगा। अभी बुंदेलखंड इलाके में पेयजल संकट की वजह से महिलाओं को दो-तीन किलोमीटर दूर तक पानी लेने जाना पड़ता है। जलस्तर में भी सुधार होगा। तालाब और कुएं भी पुनर्जीवित होंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here