कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की वजह से 10 अप्रैल से लागू किया गया है जिसके बाद लगभग 12 अप्रैल से अचानक जिले के भीतर कोरोना से पीड़ित मरीजों और अन्य लोगों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया, जिसकी रफ्तार अचानक इतनी बढ़ गई कि नगर पालिका में महत्त्व 7 दिन के भीतर 100 क्विंटल लकड़ी अंतिम संस्कार के लिए खरीदी लगभग इतनी ही मात्रा में वारसिवनी गोशाला और अन्य स्थानों से कंडों की खरीदी भी हो चुकी है।
नगर पालिका द्वारा रोजाना 15 से 20 क्विंटल लकड़ी शहर के सिविल लाइन स्थित वन विभाग की चांदमारी डिपो से खरीदी जा रही है। डिपो की प्रभारी डिप्टी रेंजर कुंजीलाल धुर्वे ने औपचारिक चर्चा के दौरान बताया कि 10 अप्रेल से लॉकडाउन लगा है। और करीब 12 अप्रैल से रोजना अंतिम संस्कार के लिए नगर पालिका द्वारा कभी 15 क्विंटल तो कभी 20 क्विंटल लकड़ी खरीदी जा रही है।
ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी शासकीय संस्था द्वारा डिपो से इतने कम दिनों में इतनी अधिक मात्रा में लकड़ी ली गई हो। यही नहीं नगर पालिका द्वारा डिपो के अधिकारियों को यह जानकारी दे दी गई है कि आगामी दिनों में उन्हें और लकड़ी की जरूरत पड़ेगी इसके लिए उन्हें समय पर लकड़ी उपलब्ध करवाई जाए।
यह तो बात हुई लकड़ी की इसी तरह वारसिवनी गौशाला सहित गायखुरी और आसपास के क्षेत्रों से जागपुर घाट में इतनी ही मात्रा में कंडे मंगवाए गए हैं। यह भी अपने आप में एक रिकॉर्ड है कि इतने कम समय में इतनी अधिक मात्रा में कंडे मंगवाए गए हैं कि लगातार दो वाहन जागपुर घाट में कंडे छोड़ने का काम कर रहे हैं।
आपको बता दें कि नगर पालिका द्वारा कोविड-पॉजिटिव मरीजों के अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी प्रदान की जा रही है।
वहीं दूसरी ओर कोविड संदेही या आईशोलेशन के दौरान मौत या फिर ऐसे लोग जिनकी जांच नही हो पाई हो, ऐसे मृतको के परिजनों द्वारा अपनों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। जिसके लिए कंडो से वैनगंगा नदी के किनारे अंतिम संस्कार कर रहे हैं यहां के हालात भी किसी से छुपे नही है।









































