प्रधानमंत्री मोदी ने पर्यावरण के लिए भारतीय योजनाओं का उल्‍लेख किया, पढ़ें उनके संबोधन की खास बातें

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ग्लासगो में चल रहे अंतरराष्ट्रीय जलवायु सम्मेलन के कांफ्रेंस आफ पार्टीज (काप-26) में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा भारत समेत विकासशील देशों के किसानों के लिए होने वाली चुनौती का मुद्दा उठाया। उन्होंने भारत के जलवायु कार्रवाई एजेंडा के बारे में और इस क्षेत्र में उठाए गए श्रेष्ठ कदमों और उपलब्धियों को लेकर जानकारी दी। पीएम मोदी ने सम्मेलन में कहा कि वैश्विक क्लाइमेट डिबेट में अनुकूलन को उतना अधिक महत्व नहीं मिला है, जितना मिटिगेशन को। यह उन विकासशील देशों के साथ अन्याय है, जो जलवायु परिवर्तन से अधिक प्रभावित हैं। भारत समेत अधिकतर विकासशील देशों के किसानों के लिए क्लाइमेट बहुत बड़ी चुनौती है। हमें अनुकूलन को अपनी विकास नीतियों और योजनाओं का मुख्य भाग बनाना है।

भारत में, ‘नल से जल’, स्वच्छ भारत मिशन और उज्ज्वला जैसी योजनाओं ने न केवल हमारे नागरिकों को गोद लेने का लाभ दिया है बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार किया है। कई पारंपरिक समुदायों को प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने का ज्ञान है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह ज्ञान अगली पीढ़ियों तक पहुंचे, इसे स्कूलों के पाठ्यक्रम में जोड़ा जाना चाहिए। स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल जीवन शैली का संरक्षण भी गोद लेने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

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