स्थाई वारंटी की जमानत करवाने के लिए रुपए लेने के मामले में पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी ने कोतवाली में पदस्थ दो आरक्षक मिथिलेश नर्रे और शरद यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उन्हें लाइन अटैच कर दिए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कोतवाली पुलिस ने 24 नवंबर को मारपीट के मामले में फरार चल रहे स्थाई वारंटी हसन सिद्दीकी 30 वर्ष काली मंदिर गंगा बाई रोड गोंदिया निवासी को गिरफ्तार किया था। कोतवाली से इस स्थाई वारंटी को दोनों आरक्षक मिथिलेश नर्रे और शरद यादव के साथ मेडिकल परीक्षण हेतु जिला अस्पताल और वहां से न्यायालय पेश करने हेतु भेजा गया था।
इन दोनों आरक्षक ने इस स्थाई वारंटी के परिजन से संपर्क कर इस स्थाई वारंटी की जमानत करवाने वकील को रुपए देने के लिए 3 हजार रुपये इस स्थाई वारंटी के परिजन से अपने दोस्त के खाते में फोन पे के माध्यम से 3000 रुपये ट्रांसफर करवा लिए थे।
स्थाई वारंटी को जब न्यायालय में पेश किया गया था। वहां पर कोई वकील उपस्थित नहीं हुआ। जमानत के अभाव में इस स्थाई वारंटी को जेल भिजवा दिया गया था। न्यायालय में कोई वकील उपस्थित नहीं होने और जमानत नहीं होने पर स्थाई वारंटी के परिजन कोतवाली पहुंचे और उन्होंने निरीक्षक केएस गहलोत को दोनों आरक्षक को जमानत के लिए 3000 रुपये देना बताया ।
वही इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को शिकायत की गई थी। पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कोतवाली में पदस्थ दोनों आरक्षक 653 मिथलेश नर्रे और आरक्षक 933 शरद यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दोनों को लाइन अटैच कर दिए। आपको बताये कि जमानत नहीं होने पर जेल पहुंचे स्थाई वारंटी हसन सिद्दीकी 27 नवंबर को जमानत पर छूटे हैं।










































