मध्य प्रदेश सरकार ने 7.50 लाख टन विदेशी कोयला खरीदने के टेंडर जारी किए थे। टेंडर खोले भी जा चुके हैं। इसी बीच बिजली की मांग काफी कम हो जाने और उत्पादन ज्यादा होने से सरकार ने विदेशी कोयला नहीं लेने का निर्णय किया है।
10 गुना महंगा विदेशी कोयला
विदेशी कोयला देसी कोयले की तुलना में 8 से 10 गुना ज्यादा महंगा पड़ रहा है। देसी कोयला की कीमत 3500 से 4000 रुपये प्रति टन है।वहीं विदेशी कोयला 15000 से 20000 प्रति टन पड रहा है। जिसके कारण सरकार ने विदेशी कोयला आयात करने से हाथ खड़े कर लिए हैं।
10 दिन का कोयला स्टाक में
बारिश के कारण प्रदेश में बिजली की खपत काफी कम हो गई है। शनिवार की शाम हाइडल प्लांट से 1837 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ है।हाइडिल पावर प्लांट पूरी क्षमता के साथ चलने की स्थिति में है। ऐसी स्थिति में कोयले की खपत बारिश के मौसम में और भी कम होगी। रोजाना कोल इंडिया से 30 हजार मैट्रिक टन कोयला मध्यप्रदेश के संयंत्रों में पहुंच रहा है।ऐसी स्थिति में विदेशी कोयले की जरूरत भी नहीं है। मध्य प्रदेश सरकार और बिजली कंपनियों की आर्थिक स्थिति भी इस लायक नहीं है कि वह महंगे कोयले का बोझ उठा पाए।
ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे ने जानकारी देते हुए कहा, विदेशी कोयले की खरीदी के लिए टेंडर जारी हुए थे। लेकिन अभी हमने कोई आर्डर नहीं दिया है। विदेशी कोयले से बिजली महंगी हो जाएगी। ऐसी स्थिति में जरूरत पड़ने पर ही विदेशी कोयले का आयात सरकार करेगी।









































