आखिर क्यों दरक रहे उत्तराखंड के पहाड़, सिर्फ भूगर्भीय प्रक्रिया या कोई बड़ा खतरा

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बीते कुछ वर्षों में हम अक्सर उत्तराखंड के पहाड़ों के दरकने, भयावह बाढ़ आने या किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा के बारे में सुनने आ रहे हैं। बीते एक दशक में उत्तराखंड में पहाड़ों के टूटने की घटना अचानक बढ़ गई है और अब हाल ही में जोशीमठ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल के धंसने की खबर ने सभी को चिंता में ला दिया था।

उत्तराखंड में टूटा था 550 मीटर चौड़ा पहाड़

फरवरी 2021 में उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने के बाद भारी तबाही हुई थी और इस त्रासदी में कई लोगों की जान चली गई थी। तब ग्लेशियर टूटने के कारण तपोवन के पास एक टनल में कई मजदूर फंस गए थे। वहीं कुछ पर्यावरणविदों का कहना है कि साल 2021 में चमोली जिले में रांति पहाड़ का 550 मीटर चौड़ा हिस्सा टूट गया था इसके चलते ही तपोवन घाटी में काफी तबाही हुई।

पहाड़ों का टूटना सामान्य व प्राकृतिक प्रक्रिया

दुनिया भर के पहाड़ों में ऐसी घटनाओं का होना सामान्य और प्राकृतिक बात है। इसमें हैरान नहीं होना चाहिए। धरती के दूरदराज के इलाकों में लगातार पर्वतों के टूटने की प्रक्रिया चलती रहती है लेकिन बीते कुछ सालों से इस प्रक्रिया में काफी तेजी आई है।

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