किसानों के लिए मुसीबत बनी बारिश, फसल भींगने से किसान परेशान

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लालबर्रा मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में गत दिवस से आसमान में बादल छाया रहने के साथ ही बारिश का सिलसिला रूकने का नाम नही ले रहा है और एक सप्ताह पूर्व हुई बारिश के बाद बारिश का सिलसिला थम गया था परन्तु पुन: ५ दिसंबर की शाम से रूक-रूक कर बारिश प्रारंभ हो गई है और यह बारिश कभी दिन, कभी रात में होती है। इस तरह बे-मौसम बारिश से खेत से खलियान तक धान भीग गया है जिसके कारण खेतों में रखी गई धान में अंकुर आने लगे है साथ ही दलहन फसल खराब हो रही है। साथ ही हरी सब्जियोंं को भी नुकसान हो रहा है जिससे किसान खासा परेशान है और दिसंबर माह के प्रथम पखवाड़े में हो रही बारिश किसानों के लिए मुसीबत बन चुकी है क्योंकि वर्तमान में भारी प्रजाति की धान की कटाई का कार्य पूरी तरह से नही हो पाया है। किसान मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे है परन्तु मौसम साफ होने का नाम नही ले रहा है और खेतों में पानी जमा होने के कारण किसान कटाई एवं पूर्व मेें कटाई कर चुके धान के कड़पे उठा नही पा रहे है जिससे जमीन पर गिरे धान की बलियां गीली होने के साथ ही उसमें अंकुर आने लगे है जिससे किसानों को काफी नुकसान होगा। वहीं गत दिवस से क्षेत्र में दिनभर बादल छाया रहने के साथ ही रूक-रूक कर हो रही बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई है जिससे ठिठुरन ठंड भी बढ़ चुकी है एवं ठंडी हवा चलने से लोगों को दिन में भी गर्म कपड़ों के साथ अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है और ठंड व बारिश होने से जनजीवन भी प्रभावित हुआ है परन्तु सबसे अधिक परेशान किसान है क्योंकि उनके पूरी मेहनत खेत-खलियानों में पड़ी हुई है उसे जमा एवं चुराई कर घर तक नही ला पा रहे है। क्षेत्र में रूक-रूक कर हो रही बारिश से धान की फसल भीग चुकी है जिससे किसानों को लाखों रूपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। किसानों ने बे-मौसम बारिश में खराब हो रही फसलों का सर्वे करवाकर मुआवजा दिये जाने की मांग शासन-प्रशासन से की है।

मौसम खुलनेे का किसान कर रहे इंतजार

आपकों बता दे कि मिचौंग तूफान व पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से म.प्र. राज्य सहित बालाघाट जिले में मौसम परिवर्तन होने के साथ ही बारिश भी हो रही है और यह आफत की बारिश से सबसे अधिक किसान परेशान है क्योंकि किसानों की धान की कटाई, गाहनी का कार्य पुरा नही हो पायेगा है, न ही दलहन फसलों की बुआई कर पाये है। बारिश होने से किसानों की पकी हुई फसल के साथ ही खलियानों में खराई बनाकर रखे धान भीग चुकी है जिससे किसान परेशान नजर आ रहे है। वहीं बारिश में भीग चुकी धान को शासन के द्वारा समर्थन मूल्य में खरीदा नही जायेगा ऐसी स्थिति में किसानों को व्यापारियों को कम दाम में विक्रय करना पड़ेगा जिससे उन्हे प्रति क्विंटल ४ से ५ सौं रूपये का नुकसान होगा। वहीं दलहन फसल चना, गेंहू, अलसी, सरसो की फसल में अत्यधिक पानी जमा होने से वह भी खराब हो चुकी है, मौसम साफ होता है तो किसानों को पुन: बीज खरीदी कर दोबारा बुआई करना पड़ेगा। खेत-खलियान में पड़ी धान को सुरक्षित एवं चुराई करने के लिए क्षेत्रीय किसानों के द्वारा मौसम साफ होने का इंतजार किया जा रहा है ताकि मौसम साफ हो और वे अपनी फसल को जमा करने के बाद उसकी चुराई कर घर तक ला सके लेकिन जिस तरह से मौसम बना हुआ है जिससे ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि मौसम साफ होने में समय लगेगा। अगर इसी तरह बारिश होते रही तो धान की फसल भींगने के साथ ही खराब हो जायेगी जिससे किसानों को काफी नुकसान होगा और वे कर्ज में डूब जायेगें क्योंकि किसान फसल लगाते समय दुसरे से कर्ज लेकर फसल लगाते है और फसल का उत्पादन लेकर उसे विक्रय कर जिस से उधारी एवं कर्ज लेता है उसे वापस करते है परन्तु बारिश होने के कारण किसान की फसल खराब हो रही है जिससे किसान चिंतित नजर आ रहे है।

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