भारत सरकार में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री स्मृति इरानी हाल ही में हज समझौते के लिए सऊदी अरब पहुंची थीं। इरानी ने वहां सऊदी के हज मंत्री के साथ द्विपक्षीय समझौता किया और साथ ही मदीना का दौरा भी किया। मदीना में स्मृति इरानी के बिना सिर ढके घूमने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आईं तो पाकिस्तान के कट्टरपंथियों को ये पसंद नहीं आया लेकिन वहां के लिबरल लोगों ने इसकी जमकर तारीफ की है। कई लोगों ने कहा उन्होंने शानदार काम किया है और ये सभी औरतों के लिए एक मिसाली कदम साबित होगा।
पाकिस्तान के यूट्यूबर कमर चीमा से बात करते हुए पाक मूल के अमेरिकी विशेषज्ञ साजिद तरार ने स्मृति ईरानी की जमकर तारीफ की और कहा है कि वह उनके फैन हो गए हैं। कारोबारी और पॉलिटिकल एक्टिविस्ट साजिद तरार ने कहा, स्मृति इरानी के मदीना जाने में पाकिस्तान के कई लोग कमियां निकाल रहे हैं जो कि समझ से परे हैं। आखिर सऊदी खुलापन लाना चाहता है तो इसमें पाकिस्तानियों को क्या दिकक्त है और फिर कुरान या हदीस में तो कहीं ये नहीं कहा गया कि कोई गैर मुस्लिम मदीना नहीं जा सकता है। मैं तो कहता हूं कि उनको मस्जिद के अंदर भी जाना चाहिए था, किसी औरत से मस्जिद जाने पर कोई रोक नहीं हैं। उनको घूमकर, चीजों को देखकर आना चाहिए था।
‘इरानी की आलोचना नहीं, तारीफ होनी चाहिए’
तरार ने कहा कि स्मृति इरानी माइनॉरिटी की मिनिस्टर हैं, वो एक तरह से भारतीय मुसलमानों की प्रतिनिधि के तौर पर सऊदी पहुंची थीं। उन्होंने मुसलान ना होते हुए भी वहां जाकर चीजों को समझने की कोशिश की, हज पर आए लोगों से मिलकर भी ये जाना कि उनको कोई मुश्किल तो पेश नहीं आ रही है। इसमें बताइए कि क्या खराब बात है, इसके लिए तो उनकी तारीफ होनी चाहिए ना कि उनकी तनकीद की जानी चाहिए। तरार ने ये भी कहा कि इस्लाम कोई ऐसा मजहब नहीं कि वो औरतों को ताले में बंद रखने को कहता हो, इस्लाम ने वक्त के साथ बदलने की बात कही है और वक्त के साथ चीजें बदलती भी रही हैं। पाकिस्तान के लोग ही इस मामले में ज्यादा तंगदिली दिखाते हैं, पाकिस्तान के लोगों को चाहिए कि ऐसे बेवजह के मामलों पर परेशान ना हों कि भारत की मिनिस्टर सऊदी क्यों चली गई। पाकिस्तानियों को अपनी हालात पर ध्यान देना चाहिए।










































