मार्क जुकरबर्ग की कंपनी Meta ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस में बड़ा कदम उठाते हुए अपना नया AI मॉडल Muse Spark लॉन्च किया है। अपने नए एआई टूल को लेकर मार्क जुकरबर्ग ने का दावा है कि यह अब तक का उनका सबसे एडवांस्ड AI मॉडल है, जो इंसानों की तरह आसपास की दुनिया को समझने की क्षमता रखता है।
9 महीने में तैयार हुआ AI मॉडल
Meta Superintelligence Labs (MSL) के प्रमुख Alexandr Wang के अनुसार, Muse Spark को सिर्फ 9 महीनों में पूरी तरह से स्क्रैच से तैयार किया गया है। यह मॉडल अब Meta के प्लेटफॉर्म्स जैसे Instagram, WhatsApp और Facebook पर चलने वाले Meta AI को पावर देगा।
क्या है Muse Spark और कितना दमदार है?
Muse Spark, Meta के नए AI मॉडल परिवार ‘Muse’ का हिस्सा है, जो पुराने Llama मॉडल्स को रिप्लेस करेगा। यह एक छोटा लेकिन तेज मॉडल है, जिसे खास तौर पर इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह साइंस, मैथ और हेल्थ से जुड़े जटिल सवालों को भी आसानी से हल कर सके। कंपनी का दावा है कि यह AI कुछ मामलों में Claude Opus 4.6 और GPT-5.4 जैसे एडवांस्ड मॉडल्स को टक्कर दे सकता है।
क्या-क्या कर सकता है यह AI?
Muse Spark की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह यूजर के आसपास की दुनिया को समझने और जटिल समस्याओं को हल करने में सक्षम है। यह साइंस और मैथ के सवालों के साथ-साथ Meta ऐप्स पर आपकी बातचीत के आधार पर भी जानकारी दे सकता है। इसके अलावा इसमें एक खास “Contemplating Mode” है, जो एक साथ कई AI एजेंट्स को काम करने की क्षमता देता है, जिससे बड़े और जटिल टास्क आसानी से पूरे किए जा सकते हैं।
शॉपिंग से लेकर स्मार्ट ग्लास तक मिलेगा सपोर्ट
यह AI Meta AI के अपडेटेड वर्जन को पावर करेगा, जो ऐप और वेबसाइट के अलावा जल्द ही Facebook, Instagram, WhatsApp, Messenger और Meta के स्मार्ट ग्लासेस में भी उपलब्ध होगा। साथ ही इसमें नया शॉपिंग मोड भी जोड़ा गया है, जो क्रिएटर्स और ब्रांड्स के आधार पर प्रोडक्ट रिकमेंडेशन देगा।
ओपन सोर्स नहीं है Muse Spark
जहां Meta अपने Llama मॉडल्स को ओपन सोर्स रखता था, वहीं Muse Spark को फिलहाल क्लोज्ड सोर्स रखा गया है। हालांकि कंपनी ने संकेत दिया है कि भविष्य में इसके कुछ वर्जन ओपन सोर्स किए जा सकते हैं। अभी यह मॉडल सीमित पार्टनर्स के लिए प्राइवेट API प्रीव्यू के तौर पर उपलब्ध है।
सेफ्टी पर भी खास ध्यान
Meta का दावा है कि Muse Spark ने सेफ्टी टेस्टिंग में बेहतर प्रदर्शन किया है। खासकर बायोलॉजिकल और केमिकल हथियारों जैसे संवेदनशील मामलों में इसने मजबूत “refusal behaviour” दिखाया है, जो इसे सुरक्षित AI मॉडल बनाता है।













































