मध्यप्रदेश में इस बार हैप्पी न्यू ईयर का जश्न दिल खोलकर मनाने के लिए तैयार हो जाएं। न तो प्रशासन की पांबदी रहेगी और न ही मौसम ज्यादा कूल होने वाला है। ठंड का तो एहसास होगा, लेकिन यह जश्न में खलल नहीं डालेगी। मौसम विभाग की मानें तो सबसे ठंडा ग्वालियर रहेगा, जहां न्यूनतम तापमान 12 डिग्री तक आ सकता है। पिछले साल यहां न्यू ईयर में रात का पारा 8 डिग्री सेल्सियस से नीचे तक आ गया था।
भोपाल-इंदौर में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री के आसपास रहने की उम्मीद है, तो हिल स्टेशन पचमढ़ी में न्यूनतम पारा 15 डिग्री तक रह सकता है। ओंकारेश्वर में रात का पारा सबसे ज्यादा 17 डिग्री तक रहेगा। 31 दिसंबर 2022 की रात 12 बजे से 1 जनवरी 2023 की सुबह 6 बजे तक प्रदेश भर में कहां-कहां कैसा रहेगा मौसम और न्यूनतम तापमान जानते हैं…।
यहां कोहरे का अलर्ट
मौसम विभाग ने छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मंदसौर, नीमच, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, ग्वालियर और दतिया में अगले चौबीस घंटों के दौरान कोहरा छा सकता है। यहां पर मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया है।
इंदौर-भोपाल में दिन का पारा चढ़ेगा
अगले दो दिन तक मध्यप्रदेश में तापमान में उतार चढ़ाव होता रहेगा। रात के तापमान में बदलाव होने की ज्यादा संभावना नहीं है। अभी तापमान 30 डिग्री के नीचे ही बना रहेगा। हालांकि इंदौर और भोपाल में दिन का पारा चढ़कर 30 डिग्री तक पहुंच सकता है। रात में यह 12 डिग्री के आसपास बना रहेगा। हालांकि ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड और बघेलखंड में दिन और रात के तापमान में बहुत वृद्धि होने की संभावना नहीं है।
रात का पारा 10 डिग्री के ऊपर रह सकता है
उत्तरी हवाओं के कारण प्रदेश के कई इलाकों में रात का पारा 10 डिग्री सेल्सियस के नीचे आ गया था, लेकिन अगले दो दिन तक रात का पारा 10 डिग्री या इससे ऊपर जा सकता है। कहीं-कहीं न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस के नीचे आ गया।
1 जनवरी से तापमान में गिरावट रहेगी
29 दिसंबर को सक्रिय सिस्टम का असर 31 दिसंबर तक रहेगा। इसके बाद दिन और रात के तापमान में गिरावट हो सकती है। इससे प्रदेश भर में ठंड अपना जोर दिखाने लगेगी। अब तक बहुत ज्यादा स्ट्रांग सिस्टम नहीं बनने के कारण ठंड का असर कम रहा है। आने वाले समय में नए सिस्टम बनने की संभावना बनने लगी है।
राजधानी से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित भोजपुर नामक गांव में बना शिवजी का मंदिर है। इसे भोजपुर मंदिर भी कहते हैं। यह मंदिर बेतवा नदी के तट पर विंध्य पर्वतमालाओं के मध्य एक पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर का निर्माण व शिवलिंग की स्थापना धार के परमार राजा भोज (1010- 1053 ई) ने करवाई थी। उनके नाम पर ही इसे भोजपुर मंदिर या भोजेश्वर मंदिर भी कहा जाता है। हालांकि कुछ किंवदंतियों के अनुसार इस स्थल के मूल मंदिर की स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है। इसे उत्तर भारत का सोमनाथ भी कहा जाता है।
यह देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह उज्जैन में स्थित, महाकालेश्वर भगवान का प्रमुख मंदिर है। पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का वर्णन मिलता है। स्वयंभू, भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव की पुण्यदायी महत्ता है। इसके दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। मान्यता है। महाकवि कालिदास ने मेघदूत में उज्जयिनी की चर्चा करते हुए इस मंदिर की प्रशंसा की है।
प्रदेश के निवाड़ी जिले में स्थित ऐतिहासिक नगर है। इसकी स्थापना रुद्र प्रताप सिंह बुंदेला द्वारा इसी नाम के राज्य की राजधानी के रूप में सन् 1501 के बाद हुई थी। ओरछा बुंदेलखण्ड क्षेत्र में बेतवा नदी के किनारे बसा है। ओरछा को मध्य प्रदेश की अयोध्या भी कहा जाता है। राम मंदिर के लिए रामजी की प्रतिमा मधुकर शाह बुंदेला के राज्यकाल (1554-92) के दौरान उनकी रानी गनेश कुंवर राजे अयोध्या से लाई थीं।
ओंकारेश्वर खंडवा जिले में स्थित है। यह नर्मदा नदी के बीच मांधाता या शिवपुरी नामक द्वीप पर स्थित है। यह भगवान शिव के बारह ज्योर्तिलिंग में से एक है। जिस ओंकार शब्द का उच्चारण सर्वप्रथम सृष्टिकर्ता विधाता के मुख से हुआ। वेद का पाठ इसके उच्चारण किए बिना नहीं होता है। इसका भौतिक विग्रह ओंकार क्षेत्र है। इसमें 68 तीर्थ हैं। यहां 33 कोटि देवता परिवार समेत निवास करते हैं।










































