दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंसियों ने आज धरती पर ब्लैकआउट का अलर्ट जारी किया है, दरअसल सूर्य पर उठा भयावह भू चुंबकीय तूफान आज धरती से टकरा सकता है और इसके भयावह परिणाम देखते को मिले सकते हैं। सौर भू-चुंबकीय तूफान से धरती पर गहरा असर देखने देखने को मिलेगा और दुनिया के अधिकांश देशों में ब्लैकआउट की स्थिति निर्मित हो सकती है।
तेजी से धरती की ओर आ रहा तूफान
वैज्ञानिकों ने जानकारी दी है कि सूर्य पर स्थित एक डेड सन स्पाट महीनों बाद जीवित हो गया है और इस सन स्पॉट को वैज्ञानिकों ने AR2987 नाम दिया है। इस प्लाज्मा बॉल के एक्टिव होने के कारण बहुत ज्यादा मात्रा में रेडिएशन धरती की ओर आ रहा है। स्पेस वेदर डॉट कॉम ने जानकारी दी है कि सूर्य के इस डेड स्पॉट के सक्रिय होने के कारण हमारे सौर मंडल के तारे पर उथल पुथल शुरू हो गई है। इस घटना को खगोल वैज्ञानिक कोरोनल मास इजेक्शन कहते हैं। दरअसल कोरोनल मास इजेक्शन के कारण जो प्लाज्मा बॉल निकली है, वह आज 14 14 अप्रैल को पृथ्वी से टकरा सकती है। धरती की ओर आने वाले इस सौर तूफान के कारण धरती पर ब्लैकआउट की स्थिति निर्मित हो सकती है। .
सैटेलाइट या पॉवर ग्रिड हो सकती है फेल
वैज्ञानिकों का कहना है कि सूर्य से निकले भयावह रेडिएशन तूफान के कारण नॉर्थ पोल के ऊपरी वायुमंडल में ज्यादा संख्या में नॉर्दन लाइट बनेंगे। धरती के उत्तरी ध्रुव पर मौजूद सैटेलाइट और पावर ग्रिड प्रभावित हो सकते हैं, जिसके कारण इन इलाकों में अंधेरा छा सकता है।
जानिए क्या है सूर्य पर मौजूद ‘डेड सन स्पॉट’
‘डेड सन स्पॉट’ सूर्य के प्रकाश मंडल की अस्थायी घटनाएं हैं। जब सूर्य के किसी भाग का ताप अन्य भागों की तुलना में काफी कम हो जाता है, तो यह एक धब्बे के रूप में दिखाई देने लगता है। इसे ही सौर कलंक या ‘डेड सन स्पॉट’ कहा जाता है। इस धब्बे का जीवनकाल सूर्य पर कुछ घंटे से लेकर कुछ सप्ताह या महीनों तक हो सकता है। कई दिनों तक ‘डेड सन स्पॉट’ बने रहने से रेडियो संचार में बाधा आती है। आमतौर पर देखा जाता है कि सूर्य पर ‘डेड सन स्पॉट’ में 11 से 21 वर्षों के अंतराल में बदलाव होता रहता है, जिससे सौर स्थिरांक में लगभग 2% (नगण्य) परिवर्तन से सूर्य के तापमान में भी परिवर्तन होता है।
धरती से भी बड़े आकार को होते हैं ये धब्बे
सूर्य पर मौजूद सनस्पॉट विभिन्न प्रकार के आकार और रूपों में होते हैं। एक सनस्पॉट के सबसे गहरे क्षेत्र को umbrage कहा जाता है। समय के साथ जैसे-जैसे सनस्पॉट परिपक्व होता है, तो सूर्य के इस क्षेत्र में कम अंधेरा होने लगता है और इन क्षेत्र को पेनम्ब्रा कहा जाता है।











































