- अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध से पूरा मिडिल ईस्ट प्रभावित है। ईरान ने होर्मूज स्ट्रेट बंद करने के ऐलान से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होगी। इसका असर भारत पर भी होने की आशंका है क्योंकि इस रूट से भारत बड़े पैमाने पर अपनी जरूरत का तेल आयात करता है। होर्मूज रूट बंद होने से तेल सप्लाई प्रभावित होने की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा हालात को देखते हुए उसकी पूरी तैयारी है। तेल और गैस की आपूर्ति जारी रहेगी और कोई बाधा नहीं आएगी। पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि भारत दुनिया भर में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का तीसरा सबसे बड़ा आयातक, चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक देश है। मिडिल ईस्ट से होने वाली शॉर्ट-टर्म दिक्कतों से निपटने के लिए देश में क्रूड ऑयल और पेट्रोल, डीजल और ATF जैसे जरूरी पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का बड़ा स्टॉक है।
- दूसरे रास्ते से तेल लाने का विकल्प खुला
- यह भी बताया गया कि पिछले कुछ सालों में, भारत ने अपने सोर्स में बदलाव करके अपनी आबादी के लिए एनर्जी की उपलब्धता और किफायत दोनों पक्की की है। भारतीय एनर्जी कंपनियों के पास अब ऐसी एनर्जी सप्लाई तक पहुंच है जो होर्मुज स्ट्रेट से होकर नहीं जाती हैं। ऐसे कार्गो उपलब्ध रहेंगे और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते समय रास्ते में कुछ समय के लिए प्रभावित होने वाली सप्लाई को कम करने में मदद करेंगे।
- 24×7 कंट्रोल रूम बनाया गया
- पेट्रोलियम मंत्रालय ने देश भर में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई और स्टॉक की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए एक 24×7 कंट्रोल रूम बनाया है। अभी, स्टॉक के मामले में सरकार काफी हद तक ठीक है। भारतीय कंज्यूमर्स के हितों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। लगातार मॉनिटरिंग के आधार पर, सरकार को उम्मीद है कि अगर ज़रूरत पड़ी, तो स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए धीरे-धीरे कदम उठाए जा सकते हैं।
40-45 दिन की जरूरत के लायक भंडार
ऊर्जा बाजार विश्लेषण फर्म केप्लर के अनुसार भारत के पास करीब 10 करोड़ बैरल वाणिज्यिक कच्चे तेल का स्टॉक है। इसमें रिफाइनरियों के पास मौजूद स्टॉक, भूमिगत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) और देश की ओर आ रहे जहाजों पर लदा तेल शामिल है। यानी ईरान संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भारत के पास लगभग 40-45 दिन की जरूरत पूरी करने लायक कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। कुल आयात का आधे से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है और इसका बड़ा भाग होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। भारत प्रतिदिन औसतन करीब 50 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 25 लाख बैरल तेल प्रतिदिन होर्मुज मार्ग से आता है।










































