किरनापुर प्रकरण में मरार समाज की नई रणनीति, अब पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे की भी

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एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक कराने आईजी से मिलेगा समाज का प्रतिनिधिमंडल, मांग नहीं मानी तो बालाघाट में होगी प्रदेश स्तरीय बैठक,

किरनापुर प्रकरण को लेकर मरार समाज एक बार फिर लामबंद होता दिखाई दे रहा है। 22 सितंबर को आयोजित समाज की बैठक में पूरे घटनाक्रम को लेकर आगे की रणनीति तय की गई। इस बार बैठक की खास बात यह रही कि भाजपा जिला अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे भी बैठक में शामिल हुए। अब तक इस प्रकरण से अपेक्षाकृत दूरी बनाए रखने वाले कावरे की बैठक में मौजूदगी के बाद मामले ने नया राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। समाज के पदाधिकारियों के साथ कावरे भी अब इस प्रकरण से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं।

बैठक में तय किया गया कि किरनापुर प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक कराने की मांग को लेकर जल्द ही समाज का प्रतिनिधिमंडल पुलिस महानिरीक्षक, बालाघाट जोन से मुलाकात करेगा। प्रतिनिधिमंडल द्वारा यह भी पूछा जाएगा कि समाज की ओर से पूर्व में सौंपे गए ज्ञापन पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और एसआईटी की जांच में क्या निष्कर्ष सामने आए हैं। समाज का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। बैठक में 2 सितंबर की रात किरनापुर थाने में मरार समाज की महिला सावित्री चौधरी और उनके पति कैलाश चौधरी के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित मारपीट के मामले पर विस्तार से चर्चा हुई। समाज ने इस घटना को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग दोहराई। दूसरी ओर 15 सितंबर को किरनापुर में आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान थाने में हुए उपद्रव और उसके बाद दर्ज किए गए प्रकरणों को लेकर भी समाज पदाधिकारियों ने अपनी बात रखी। समाज पदाधिकारियों का आरोप है कि 15 सितंबर की घटना में समाज के किसी भी पदाधिकारी की भूमिका नहीं थी, इसके बावजूद कई पदाधिकारियों तथा ऐसे लोगों के नाम भी प्राथमिकी में दर्ज किए गए जो उनके अनुसार घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। इसी को लेकर बैठक में समाज के पदाधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्रकरण वापस लेने की मांग किए जाने पर सहमति बनी। इधर, इस पूरे घटनाक्रम में अब 63 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज हो गयी हैं । इनमें स्वयं सावित्री चौधरी के पति कैलाश चौधरी का नाम भी आरोपी के तौर पर दर्ज होने की जानकारी दी गई है। समाज से जुड़े कुछ जनप्रतिनिधियों और सामाजिक लोगों के नाम भी प्रकरण में शामिल होने की बात कही जा रही है। यही बिंदु अब समाज की आगामी रणनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। अब तक इस मामले से दूर रहे भाजपा जिला अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे का समाज की बैठक में शामिल होना भी चर्चा का विषय बन गया है। बैठक में उनकी मौजूदगी के बाद समाज की मांगों को लेकर आगे की गतिविधियां अधिक व्यापक रूप लेती दिखाई दे रही हैं। हालांकि इस मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से दर्ज प्रकरणों तथा एसआईटी की रिपोर्ट को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक दस्तावेज और पुलिस पक्ष से स्पष्ट होना बाकी है। बैठक में समाज पदाधिकारियों ने कहा कि यह प्रकरण केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे समाज की सामाजिक छवि भी प्रभावित हुई है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, एसआईटी रिपोर्ट सार्वजनिक करने और समाज के लोगों के खिलाफ दर्ज प्रकरणों की समीक्षा की मांग को प्रमुखता से उठाया जाएगा। समाज ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में पुलिस महानिरीक्षक से मुलाकात के बाद यदि उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो बालाघाट में प्रदेश स्तरीय मरार समाज की बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में आगे की रणनीति पर सामूहिक निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आईजी से होने वाली मुलाकात के बाद किरनापुर प्रकरण किस दिशा में आगे बढ़ता है और एसआईटी की रिपोर्ट को लेकर प्रशासन का रुख क्या रहता है।

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