कैसे ग्लोबल इकोनॉमी को तबाह कर सकता है AI, रिपोर्ट ने मचाया तहलका

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Citrini Research की रिपोर्ट ‘The 2028 Global Intelligence Crisis’ बताती है कि आने वाले दिनों में एजेंटिक AI (AGI) व्हाइट-कॉलर नौकरियों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। इसकी वजह से पूरी दुनिया Ghost GDP और प्राइवेट क्रेडिट व मॉर्गेज रिस्क से जूझते हुए पारंपरिक परिभाषाओं के हिसाब से तबाही की तरफ बढ़ सकती है।

क्या कहती है रिपोर्ट?

Citrini Research के अलाप शाह ने अपनी रिपोर्ट “द 2028 ग्लोबल इंटेलिजेंस क्राइसिस” में एक ऐसे परिदृश्य को पेश किया है, जिसमें बताया गया है कि किस तरह से AI के पास अब उन नौकरियों को खत्म करने की क्षमता आ चुकी है, जिन्हें दुनिया के सबसे बुद्धिमान और कुशल लोगों का काम माना जाता रहा है। लेकिन, पहली बार इन नौकरियों पर खतरा आया है।

  1. रिपोर्ट में कहा गया है यह कोई “भविष्यवाणी” नहीं बल्कि एक “थॉट एक्सरसाइज” है।
  2. रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में AI की क्षमताओं में “स्टेप-फंक्शन जंप” आया है।
  3. इसमें 2026 से 2028 के बीच AI के कारण संभावित आर्थिक घटनाक्रम की काल्पनिक टाइमलाइन पेश की गई है।
  4. रिपोर्ट की सबसे बड़ी दलील यह है कि एजेंटिक AI अब केवल सहायक टूल नहीं रहा, बल्कि ह्यूमन इंटेलिजेंस का सीधा विकल्प बनता जा रहा है।

इसके साथ ही रिपोर्ट मे बताया गया है कि कैसे AGI की वजह से बड़ी टेक कंपनियों ने बड़े पैमाने पर व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों की जगह AI एजेंट्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है । इससे कॉरपोरेट मार्जिन सुधरे हैं। , शेयर बाजार चढ़े, लेकिन रोजगार आधार कमजोर होने लगा।

“नो नेचुरल ब्रेक” वाला फीडबैक लूप

रिपोर्ट का सबसे अहम कॉन्सेप्ट “AI-Driven Economic Feedback Loop” है। रिपोर्ट के मुताबिक AI-ड्रिवन इकोनॉमिक फीडबैक लूप एक सेल्फ-रीइन्फोर्सिंग साइकिल है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम अपनी परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए इकोनॉमिक डेटा को प्रोसेस करते हैं, जिससे प्रोडक्टिविटी बढ़ती है, AI को का एडॉप्शन बढ़ता है। इससे इकोनॉमिक स्ट्रक्चर में बड़े और तीव्र बदलाव होते हैं। ये लूप ग्रोथ को बढ़ाने वाले “प्रोडक्टिविटी इंजन” के तौर पर काम कर सकते हैं या “नेगेटिव फीडबैक लूप” के तौर पर काम कर सकते हैं, जो नई नौकरियां बनने से भी तेजी से इंसानी मेहनत को ऑटोमेटेड सिस्टम से बदलकर रुकावट को बड़ा बना सकते हैं।

इकोनॉमी पर कैसे आएगा असर

रिपोर्ट में बताया गया है कि जैसे-जैसे AI बेहतर और सस्ता होगा तमाम कंपनियां अपने कर्मचारियों की छंटनी करेंगी। इसकी वजह से नौकरी खोने वाले कर्मचारी खर्च घटाएंगे, जिससे इकोनॉमी में डिमांड कमजोर होगी, ऐसे में कंपनियां मार्जिन बढ़ाने के लिए AI में और ज्यादा निवेश करेंगी, जिससे इंसानी कर्मचारियों की संख्या और घटेगी, जिससे डिमांड और घटती चली जाएगी। रिपोर्ट के पेज 4 पर “Ghost GDP” शब्द का इस्तेमाल किया गया है। इसका मतलब है कि उत्पादकता और कॉरपोरेट मुनाफा तो बढ़ता है, लेकिन वह आम उपभोक्ता तक नहीं पहुंचता, क्योंकि नौकरी गंवाने वाले लोग खर्च नहीं कर पाते।

रोजगार संकट का गणित

रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका में टॉप 20 फीसदी कमाई करने वाले लोग कुल उपभोक्ता खर्च का लगभग 65 फीसदी हिस्सा रखते हैं। यही वर्ग AI से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है। इसी तरह पेज 18 पर बताया गया है कि अगर व्हाइट-कॉलर रोजगार में केवल 2 फीसदी गिरावट भी आती है, ग्लोबल GDP को 3 से 4 फीसदीह का झटका लग सकता है। हाई इनकम क्लास के बचत होने से शुरुआती झटका देर से दिखता है, लेकिन असर गहरा होता है। इसके साथ ही रिपोर्ट में 2028 तक बेरोजगारी दर 10 फीसदी पार करने और S&P 500 में 57 फीसदी तक गिरावट की आशंका का काल्पनिक परिदृश्य पेश किया गया है।

SaaS से लेकर प्राइवेट क्रेडिट तक हर जगह झटके

रिपोर्ट के पेज 6 से 10 में बताया गया है कि एजेंटिक AI की वजह से सॉफ्टवेयर एज सर्विसेज (SaaS) देने वाली कंपनियों के वैल्यूएशन में भारी कमी आ सकती है। अगर ये कंपनियां खुद AI की मदद से सॉफ्टवेयर बना पाती हैं, तो वे महंगे सब्सक्रिप्शन रिन्यू नहीं करेंगी। लेकिन, कर्मचारियों के लिहाज से दोनों ही सूरत ठीक नहीं। इसके बाद झटका प्राइवेट क्रेडिट मार्केट तक पहुंचता है।

रिपोर्ट के पेज 19 और 20 में Zendesk जैसे मामलों का हवाला देते हुए बताया गया है कि जब AI किसी बिजनेस मॉडल को ही अप्रासंगिक बना दे, तो एनुअल रिअकरिंग रेवेन्यू (ARR) आधारित लोन मॉडल भी तबाह हो सकता है। इसके साथ ही रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि इंश्योरेंस कंपनियों और प्राइवेट क्रेडिट फंड्स तक इस नुकसान की आंच फैलती है, तो “डेजी चेन ऑफ कोरिलेटेड बेट्स” से पूरी दुनिया की वित्तीय प्रणाली को झटका लग सकता है।

सरकार की सीमाएं

पेज 27 से 29 में बताया गया है कि सरकार की कर वसूली मुख्यतः मानव श्रम से होने वाली आय पर निर्भर है। यदि AI के कारण श्रम आय घटती है और पूंजी लाभ होता है, तो टैक्स बेस सिकुड़ सकता है। रिपोर्ट में “Transition Economy Act” और “Shared AI Prosperity Act” जैसे काल्पनिक नीति विकल्पों का जिक्र किया गया है, जिनमें AI कंप्यूट पर टैक्स या प्रत्यक्ष ट्रांसफर का विचार शामिल है। लेकिन, राजनीतिक मतभेद इस नीतिगत प्रतिक्रिया को धीमा कर सकते हैं।

भारत के लिए संकेत

रिपोर्ट के पेज 16 में भारत का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि एजेंटिक AI की वजह से भारत का IT सर्विस एक्सपोर्ट मॉडल भारी दबाव मे आकर बिखर सकता है। इसकी वजह से भारत की इकोनाॅमी को कई मोर्चों पर एक साथ झटका लगा सकता है। मसलन, इससे चालू खाता घाटा बढ़ सकता है। रुपये पर दबाव गहरा सकता है। हालांकि, यह भी एक संभावित परिदृश्य है, न कि निश्चित भविष्य।

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