पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। वारासिवनी जनपद पंचायत अंतर्गत क्षेत्र के सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा के कार्य ग्रामीण स्तर पर रोजगार उपलब्ध नहीं होने से पलायन तेज हो गया है। रोजगार की तलाश में ग्रामीण क्षेत्र से लोग महानगरों की तरफ जा रहे हैं। जबकि भारत सरकार के द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के पलायन को रोकने स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन करने के लिए मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना लागू की गई थी। परन्तु बीते ६ महीने से ग्राम पंचायतों में मनरेगा के काम नहीं है और नाही पुरानी मजदूरी एवं सामग्री का भुगतान किया गया है। यही कारण है कि पंचायत के पास मनरेगा का कार्य नही होने के कारण मजदूर विहीन गांव होने लगे हैं। वर्तमान में पलायन पहले से ज्यादा बड़ा है मजदूरों पर आर्थिक संकट बन रहा हैं। ऐसे में ग्राम सरपंचों सहित ग्रामीणों के द्वारा मनरेगा कहे या गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण योजना में काम देने की मांग शासन प्रशासन से की जा रही है।
हैदराबाद ,नागपुर सहित अन्य प्रदेशो में पलायन कर रहे ग्रामीण
भारत सरकार के द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के पलायन को रोकने स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा लागू की गई थी। जिसमें प्रत्येक मजदूरो को १०० दिवस के कार्य की गारंटी दी गई थी जिसमें मजदूरों को कार्य भी दिया गया और कोरोना काल में यह योजना लोगों का सहारा बनी। परंतु वर्तमान में यह योजना वारासिवनी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत में हासिये पर नजर आ रही है। जहां पर पूर्व में मनरेगा योजना अंतर्गत पक्के निर्माण कार्य करवाए गए थे । उसमें कई मजदूरों की मजदूरी तो वहीं निर्माण सामग्री का भी भुगतान आज तक नहीं हो पाया है। तो वहीं बीते ६ महीना से अधिक का समय हो गया है पंचायतों को मनरेगा के तहत कोई कार्य भी स्वीकृत नहीं किया गया है। वहीं बीते १ वर्ष में १०० दिनों की रोजगार गारंटी का भी वादा पूरा नहीं किया गया है। ऐसे ग्रामीण क्षेत्र के मजदूर बहुत ज्यादा परेशान है तो वहीं पंचायत में मनरेगा मजदूरी नही होने पर दैनिक कार्य अवरुद्ध पड़े हुए हैं। इसी के साथ ग्रामीणों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर कार्य की उपलब्धता नही होने के कारण पलायन का चलन बढ़ गया है। बड़ी संख्या में लोग हैदराबाद, नागपुर ,रायपुर सहित अन्य महानगरों में रोजगार की तलाश में जा रहे हैं। हालांकि बीते दिनों भारत सरकार के द्वारा मनरेगा योजना का नाम परिवर्तित कर गारंटी फ ॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण कर १०० दिन के रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर १२५ दिन कर दिया गया। परंतु यह सब होने के बाद भी मजदूरों के हाथ में काम नहीं है जो एक चिंता का विषय है। ऐसे में अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के मजदूर परिवार महिला पुरुष बुजुर्ग सभी वर्ग के लोग महानगर की तरफ पलायन कर रहे हैं यह स्थिति बीते कुछ समय से बढ़ गई है। ऐसे में ग्राम पंचायत सहित ग्रामीणों के द्वारा शासन प्रशासन से मनरेगा अंतर्गत कार्य पंचायत में स्वीकृत देने और हर हाथ को रोजगार गारंटी के तहत रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है।
मजदूरो को नही मिल रहा मनरेगा में काम इसलिये पलायन कर रहे है-अरविंद बावने
मजदूर अरविंद बावने ने बताया कि हम सीमेंट रोड और नाली में मनरेगा का काम करे थे पर अभी तक हमारा मजदूरी भुगतान नहीं हो पाया है। उसके बाद कोई काम भी मनरेगा का नहीं आ रहा है यही कारण है कि हम लोग नागपुर बाहर कमाने जा रहे हैं। ५ माह करीब हो गया है हमारा भुगतान हमें नहीं मिला है इस बात को हमने सरपंच को भी कहा तो वह कहते हैं कि आ जाएगा। यह भुगतान सीधे हमारे खाते में आता है परंतु अभी दिक्कत की स्थिति हमारे लिए बन गई है। यह मेरा अकेले का भुगतान नहीं है मेरे जैसे अन्य मजदूर है उनका भी भुगतान रुका हुआ है।
ग्राम पंचायतों में मजदूरों को काम नही मिलने से आक्रोश है- सुभाष झाड़ेकर
सरपंच सुभाष झाडेकर ने बताया कि हमारे यहां बहुत दिक्कत हो रही है मनरेगा में काम नहीं हो रहा है पेमेंट भी नहीं आ रहा है और काम भी नहीं मिल रहा है। गांव में २०० करीब लोगों का पलायन हो चुका है वह कमाने के लिए बाहर जा रहे हैं। क्योंकि मनरेगा में काम नहीं है पलायन अभी रुका नहीं है लगातार लोग बाहर जा रहे हैं वह बहुत परेशान हैं। जनता का पलायन रुक नहीं रहा है हैदराबाद ,नागपुर यह सब लोग कमाने जा रहे हैं आर्थिक संकट सबके सामने है। पंचायत में अभी ६ माह से कोई नया काम नहीं आया है और ना ही भुगतान हुआ है हम तो यही चाहते हैं कि मजदूरों को काम मिले जल्द भुगतान हो और यह जो पलायन हो रहा है उसे रोका जाए। जिसके लिए रोजगार गारंटी बनाई गई थी योजना तो है पर रोजगार की गारंटी समझ नहीं आ रही।
सरकार ने १०० दिन के बदले १२५ दिन कर दिये फिर भी काम नही दे रहे है-सुनील राणा
सरपंच प्रतिनिधि सुनील राणा ने बताया कि एक वर्ष से ज्यादा का समय हो गया है हमारी पंचायत में मनरेगा योजना का काम नहीं है। मजदूरों को भी काम नहीं मिल रहा है मनरेगा में जो पूर्व के कार्य थे उसकी सामग्री एवं मजदूरी का भुगतान भी सरकार नहीं कर पाई है। आज देश में मनरेगा योजना लागू हुई इतने साल हो गए जिसे नई सरकार ने भी यथावत रखा। परंतु उसका अब नाम बदलकर जी राम जी योजना कर दिए १०० दिन को १२५ दिन रोजगार की गारंटी कर दिए। इसमें बीते एक वर्ष में भी किसी मजदूर को १०० दिन का रोजगार नहीं मिला है और ना ही काम करें कुछ मजदूरों का भुगतान हुआ है। मनरेगा में काम नहीं मिलने के कारण गांव मजदूरों से खाली हो रहे हैं लोग हैदराबाद ,नागपुर और अन्य महानगरों की तरफ पलायन कर रहे हैं। सरकार को इस पर ध्यान देकर व्यवस्था बनानी चाहिए हर पंचायत में मनरेगा के काम देना चाहिए ताकि ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहे और पलायन उन्हें ना करना पड़े।










































