केवल देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में प्रतिवर्ष 4 फरवरी के दिन को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है। जहां कैंसर से बचने और कैंसर रोग की जन जागरूकता के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन किए जाते हैं।
कैंसर से पीड़ित व्यक्तियों और सामान्य लोगों को भी कैंसर से बचने, लक्षण पाए जाने पर कैंसर की जांच कराकर उसका उपचार कराने और शासकीय योजनाओं आदि की जानकारी देकर इस रोग के प्रति लोगों को जागरूक किए जाने का प्रयास किया जाता है।
लेकिन इसे बालाघाट जिले का दुर्भाग्य ही कहे कि आजादी के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी जिले में कैंसर उपचार के लिए रैडियोथैरेपी-कीमोथैरेपी आदि की सुविधा नहीं है। जहा उपचार की बात तो दूर जिले के सबसे बड़े चिकित्सालय जिला अस्पताल में कैंसर की जांच तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। बावजूद इसके भी शासन-प्रशासन द्वारा महज जन जागरूकता अभियान के भरोसे कैंसर की रोकथाम किए जाने का दावा किया जा रहा है ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिले में जब कैंसर जांच और उसके उपचार की सुविधा ही नहीं है तो फिर महज जन जागरूकता के भरोसे जिले को कैंसर मुक्त कैसे बनाया जा सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 4 फरवरी 2022 तक जिले में कैंसर पीड़ित 140 मरीज रजिस्टर्ड है।ये केवल वे मरीज है जिन्होंने कैंसर पीड़ित होने पर जिला स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दी है जबकि प्रदेश के अन्य जिलों व देश के अन्य राज्यों के निजी अस्पतालों में कैंसर का उपचार कराने वाले जिले के रोगियों के आंकड़े भी जिला प्रबंधन के पास उपलब्ध नहीं है।
बात अगर कैंसर रोगियों की करे तो पुरुष के मुकाबले महिलाओं में कैंसर की शिकायतें अधिक है जहां जिले सहित पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा शिकायतें महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की आ रही है वही महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के अलावा बच्चेदानी का कैंसर और सर्वाइकल का कैंसर सबसे ज्यादा पाया जा रहा है।वहीं पुरुषों में मुंह, फेफड़ा, गॉल ब्लाडर से संबंधित कैंसर के रोगी अधिक है।
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन संजय धबड़गाव ने बताया कि इस वर्ष 4 फरवरी से 4 मार्च तक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है जिसमें रोगियों की स्कूटनी कराकर उनकी जांच कराना है सभी प्रकार के टेस्ट कराना है जिले में 140 एक्टिव मरीज रजिस्टर्ड है जिन्हें समय-समय पर सलाह दी जाती है।
यदि किसी व्यक्ति में कैंसर के लक्षण दिखते हैं तो उसे टेस्ट करने के लिए जिला अस्पताल से जबलपुर भेजा जाता है वहां पर उसके कैंसर की जांच होती है वही कीमोथैरेपी का पहला डोज लगता है उसके बाद वहां के चिकित्सक उनका ट्रीटमेंट और आवश्यक दवाइयां लिखकर उनके उपचार का शेड्यूल बना कर जिला अस्पताल भेज देते हैं।










































