डिजिटल होगा देश का न्याय सिस्टम! CJI सूर्यकांत ने दिखाया तेज और आसान न्याय का रोडमैप

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  • देश की न्याय व्यवस्था को आम लोगों के लिए ज्यादा आसान और तेज बनाने की दिशा में बड़ा खाका सामने आया है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा है कि अब न्याय सिर्फ अदालतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीक के जरिए हर व्यक्ति तक पहुंचेगा। आज सुप्रीम कोर्ट में हुए एक राष्ट्रीय सम्मेलन में अपने उद्घाटन संबोधन में मुख्य न्यायाधीश ने साफ किया कि आने वाले समय में न्याय व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और ज्यादा पारदर्शी बनाने पर जोर रहेगा।
  • न्याय का मूल सिद्धांत: हर व्यक्ति तक पहुंच
  • सीजेआई ने अपने संबोधन की शुरुआत एक मूल बात से की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को न्याय मिलना चाहिए। वह भी बिना भेदभाव, समय पर और प्रभावी तरीके से। उन्होंने माना कि समाज बदल रहा है, इसलिए न्याय देने वाली संस्थाओं को भी बदलना होगा।
  • तकनीक जरूरी, लेकिन पर्याप्त नहीं
  • सीजेआई ने साफ किया कि केवल तकनीक अपनाने से समस्या हल नहीं होगी। उनके मुताबिक अगर प्रक्रियाएं जटिल रहेंगी तो तकनीक सिर्फ थोड़ी सुविधा दे पाएगी। इसलिए जरूरी है कि न्यायिक प्रक्रियाओं को भी सरल बनाया जाए।
  • ई कोर्ट परियोजना का शानदार सफर
  • उन्होंने बताया कि ई कोर्ट की शुरुआत 2005 में जरूरत के कारण हुई थी।इसके तहत 19 हजार से ज्यादा जिला और निचली अदालतों का कंप्यूटरीकरण हुआ। हजारों अदालतों में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर लगाए गए। यह पूरी व्यवस्था आगे के डिजिटल बदलाव की नींव बनी।
  • डेटा और पारदर्शिता में बड़ा बदलाव आया
  • सीजेआई ने कहा कि डिजिटल बदलाव के दूसरे चरण में कई अहम कदम उठाए गए। इनमें शामिल हैं, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, जिसमें करोड़ों मामलों का डेटा उपलब्ध है। ई फाइलिंग, जिससे लोग घर बैठे केस दाखिल कर सकते हैं। साथ ही एसयूवीएएस सॉफ्टवेयर, जो फैसलों का अलग अलग भाषाओं में अनुवाद करता है। इनसे न्याय व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी और सुलभ बनी है।
  • सीजेआई ने बताया कि तीसरे चरण में सरकार ने 7210 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका मकसद है देश के दूर दराज इलाकों तक डिजिटल न्याय पहुंचाना और हर अदालत को तकनीक से जोड़ना। उन्होंने कहा कि असली सफलता तब होगी जब यह व्यवस्था गांव तक पहुंचेगी।
  • ई सेवा केंद्र बने आम लोगों का सहारा
  • डिजिटल व्यवस्था को लोगों तक पहुंचाने के लिए 2331 ई सेवा केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर केस की जानकारी मिलती है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा है और आम लोगों को तकनीकी मदद दी जाती है। सीजेआई ने कहा कि इससे उन लोगों को भी मदद मिलेगी जो तकनीक से परिचित नहीं हैं।
  • ‘डिजिटल न्याय’ की नई सोच पर CJI का जोर
  • सीजेआई ने एक नई सोच सामने रखी।उन्होंने कहा कि भविष्य में न्याय सिर्फ एक जगह नहीं होगा। बल्कि एक सेवा की तरह हर व्यक्ति तक उपलब्ध होगा। इसका मतलब है कि पूरा सिस्टम डिजिटल रूप में काम करेगा।
  • सीजेआई ने कहा कि अब लक्ष्य है कि अदालतें पूरी तरह पेपरलेस हों। हाइब्रिड सुनवाई आम बात बने। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि समानता और न्याय का माध्यम बन चुकी है।
  • इस नेशनल कॉन्फ्रेंस में कई नई सेवाओं की शुरुआत का जिक्र भी किया गया।जैसे सिंगल साइन ऑन पोर्टल, ई मेल के जरिए समन भेजने की व्यवस्था, ई कोर्ट और ई प्रिजन का एकीकरण।
  • राज्यों और अदालतों की भूमिका होगी महत्वपूर्ण
  • सीजेआई ने कहा कि हाई कोर्ट और निचली अदालतों ने भी इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। अलग अलग जगहों पर कई अच्छे प्रयोग हुए हैं। इन अनुभवों को साझा करना जरूरी है ताकि पूरे देश में सुधार हो सके। 

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