वॉशिंगटन: अमेरिका को भले एक साम्राज्यवादी ताकत बताया जाता रहा हो लेकिन असल बात यह है कि अमेरिकी जनता दूर-दराज के देशों में चलने वाले लंबे संघर्षों में कोई दिलचस्पी नहीं रखती। कोरियाई युद्ध में यह बात साफ हो गई थी। तीन साल तक चले युद्ध के बाद अमेरिका ने कहा- बहुत हो गया, और कोरिया में मौजूदा स्थिति को स्वीकार कर लिया। राजनीतिक इच्छाशक्ति की यही कमी बाद में वियतनाम में भी देखने को मिली, जहां 9 साल बाद अमेरिका ने हार मान ली। अफगानिस्तान में उसने 19 साल और 10 महीने बाद हार मानी। अब वह ईरान से निकलने की तैयारी कर रहा है।
हालांकि, संघर्ष कुछ और समय तक जारी रह सकता है क्योंकि शांति वार्ता को कई मुश्किल मुद्दों को सुलझाना होगा- जैसे कि क्या युद्धविराम में लेबनान भी शामिल है, क्या ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को बिना रोक-टोक गुजरने देगा, लेकिन एक बात जो साफ है वह यह कि अमेरिका जल्द से जल्द दुश्मनी खत्म करने के लिए बेचैन है।










































