दुनिया भर के सभी देशों में विदेशी मुद्रा का भंडार तेजी के साथ घट रहा है। जिसको लेकर वैश्विक व्यापार संधि और वैश्विक व्यापार पर सवालिया निशान उठना शुरू हो गए हैं।
इस वर्ष अभी तक विदेशी मुद्रा का भंडार 82 लाख करोड़ घटकर 984 लाख करोड़ रह गया है। पिछले साल के अंत में 1067.64 लाख करोड़ का विदेशी मुद्रा भंडार था।
ब्लूमबर्ग रेटिंग एजेंसी 2003 से विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े को एकत्रित कर रही है। एजेंसी के अनुसार अभी तक की यह सबसे बड़ी गिरावट है। सभी देश अपनी मुद्रा को गिरने से बचाने के लिए डॉलर की बिक्री करने से यह स्थिति निर्मित हुई है। अन्य मुद्राओं की तुलना में डालर मुद्रा पिछले 20 वर्षों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। जबकि अन्य देशों की मुद्रा बड़ी तेजी के साथ गिर रही है। 2022 में अब तक रुपया डालर के मुकाबले 9 फ़ीसदी कमजोर हुआ है। वहीं जापान ने येन को थामने के लिए पहली बार 1.64 लाख करोड़ के बराबर डालर खर्च किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका असर वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है। कीमतों में भारी फेरबदल और निर्यात व्यापार प्रभावित होने से वैश्विक व्यापार संधि को लेकर अब सभी देश डालर मुद्रा के विकल्प की तलाश में लग गए हैं। आने वाले समय में डालर मुद्रा को वैश्विक व्यापार में सबसे बड़ी चुनौती मिलने की संभावना बन गई है।










































