नगर में रात्रिकालीन डी.जे. पर लगाई जाए रोकसख्ती की मांग को लेकर डहरवाल कलार समाज संगठन ने सौपा ज्ञापन

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पदमेश न्यूज़,बालाघाट। जिले में सामाजिक सुधार और जनहित को ध्यान में रखते हुए डहरवाल कलार समाज संगठन द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिसको लेकर 24 फरवरी मंगलवार को डहरवाल कलार संगठन के द्वारा एक ज्ञापन कलेक्टर के नाम अपर कलेक्टर को सौंपा हैं। उन्होने कहा कि देर रात्रि तक डी.जे. ध्वनि से बच्चों और आम नागरिकों को भारी परेशानियां हो रहीं हैं, इसको लेकर जिला प्रशासन सख्ती अपनाते हुए उन पर कड़ी कार्यवाही की मांग की हैं।इस मौके पर जिला अध्यक्ष राजेन्द्र साकरे, संगठनमंत्री शिवाजी बाविस्ताले, दुर्गाप्रसाद बाविस्ताले, परदेशी राठौर, भुपेन्द्र बघेल, रविशंकर मंडलेकर, भुपेन्द्र डहरवाल, उमा शंकर नगरगड़े, पंकज डहरवाल, किशोरी लाल डहरवाल, मेहश बघेल सहित अन्य लोगों की मौजूदगी रहीं।

10 बजे के बाद लगे डीजे पर रोक
संगठन पदाधिकारी ने बताया कि विगत वर्ष डहरवाल कलार समाज स्तर पर यह निर्णय लिया गया था कि किसी भी सामाजिक व्यक्ति द्वारा अपने बच्चों के विवाह में आयोजित लग्न कार्यक्रम रात्रि अधिकतम 10 बजे तक ही सम्पन्न किए जाएं तथा इसके बाद डी.जे. एवं अन्य तेज ध्वनि वाले उपकरणों का उपयोग पूर्णत: बंद कर करने का निर्णय लिया हैं।हमने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से विनम्र अपील की है कि जनहित में पूरे वर्ष जिले भर में रात्रि 10 बजे के बाद बजने वाले डी.जे. तथा तय ध्वनि सीमा से अधिक शोर करने वालों के खिलाफ सख्त प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाए। संगठन का मानना हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो इसका नकारात्मक असर समाज की शांति, स्वास्थ्य और आपसी सौहार्द पर पड़ेगा। संगठन ने प्रशासन से यह भी अनुरोध किया है कि आम जनता को जागरूक करने के लिए पुलिस एवं प्रशासन की ओर से स्पष्ट जनहितकारी एडवाइजरी जारी की जाए, ताकि विवाह एवं अन्य आयोजनों में ध्वनि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके और अनावश्यक ध्वनि प्रदूषण, शराबखोरी एवं दंगे-फसाद जैसी सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

आदेशो का हो रहा लगातार उलंघन-साकरे
डहरवाल कलार समाज के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र साकरे ने बताया कि जिला प्रशासन के द्वारा आदेश किया गया हैं कि 10 बजे के बाद भी डी.जे. प्रतिबंधत रहेंगा, लेकिन सख्ती जिला प्रशासन के द्वारा नहीं बरती जा रहीं हैं, जिससे आदेश का उल्लंघन करते हुए देर रात्रि तक बजते रहते हैं।इस सामाजिक निर्णय के बावजूद कुछ असामाजिक तत्वों एवं अन्य समाज के लोगों द्वारा समय-सीमा का उल्लंघन करते हुए देर रात तक या पूरी रात डी.जे. बजाया जा रहा हैं। इससे न केवल निर्धारित ध्वनि मानकों की अवहेलना हो रही है, बल्कि अत्यधिक शोरगुल के कारण ध्वनि प्रदूषण भी फैल रहा है। आगे कहा कि तेज आवाज की आड़ में शराबखोरी, आपसी विवाद और दंगे-फसाद जैसी घटनाओं को बढ़ावा मिल रहा है, जो समाज और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए घातक है।

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