- Aqua Line to Botanical Garden: नोएडा और ग्रेटर नोएडा के निवासियों के लिए एक बड़ी सौगात देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने नोएडा मेट्रो के विस्तार को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब एक्वा लाइन का दायरा सेक्टर-142 से सीधे बॉटनिकल गार्डन तक हो जाएगा, जिससे नोएडा और दिल्ली के बीच का सफर न केवल आसान होगा, बल्कि लाखों यात्रियों के समय की भी बचत होगी।
- एक्वा लाइन का सीधा जुड़ाव और 8 नए स्टेशन
- इस नए कॉरिडोर की कुल लंबाई 11.56 किलोमीटर होगी और यह पूरी तरह से एलिवेटेड होगा। इस विस्तार के साथ ही बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन एक विशाल इंटरचेंज हब के रूप में उभरेगा, जहां यात्री सीधे दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन और मैजेंटा लाइन पर स्विच कर सकेंगे। इस रूट पर कुल 8 नए स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें सेक्टर-44, सेक्टर-97, सेक्टर-105, सेक्टर-108, सेक्टर-93 और पंचशील बालक इंटर कॉलेज जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इस परियोजना के पूरा होने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सक्रिय मेट्रो नेटवर्क बढ़कर 61.62 किलोमीटर हो जाएगा।
- आईटी हब और शिक्षा संस्थानों को मिलेगा बढ़ावा
- यह नया मेट्रो लिंक केवल सफर सुहाना नहीं करेगा, बल्कि शहर के आर्थिक और शैक्षणिक परिदृश्य को भी नई गति देगा। यह कॉरिडोर एडवेंट बिजनेस पार्क (सेक्टर-142), स्काईमार्क वन मॉल (सेक्टर-98) और माइक्रोसॉफ्ट और टीसीएस जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों के दफ्तरों को सीधे मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेगा। इसके अलावा एमिटी यूनिवर्सिटी और महामाया बालिका इंटर कॉलेज जैसे संस्थानों के छात्रों को भी अब यातायात की समस्या से जूझना नहीं पड़ेगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से सड़कों पर गाड़ियों का दबाव कम होगा और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
शहरों के भविष्य के लिए 1 लाख करोड़ का बड़ा फंड
मेट्रो विस्तार के साथ ही केंद्र सरकार ने ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (UCF) को भी हरी झंडी दिखाई है। इसके तहत सरकार अगले पांच वर्षों में शहरी बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की सहायता प्रदान करेगी। इस फंड का मुख्य उद्देश्य शहरों के विकास को अनुदानों के बजाय बाजार-आधारित और सुधार-संचालित मॉडल पर ले जाना है। इससे न केवल स्मार्ट सिटी और परिवहन ढांचे में सुधार होगा, बल्कि 2031 तक शहरी क्षेत्र में कुल 4 लाख करोड़ रुपये के निवेश की भी उम्मीद है। यह फंड विशेष रूप से उन शहरों पर ध्यान देगा जो नवाचार और वित्तीय अनुशासन के साथ अपने बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए तैयार हैं













































