भीषण गर्मी के इस दौर में पेयजल की मांग ना सिर्फ इंसानों में बल्कि वन्य प्राणियों में भी देखी जा रही है जहां जंगलों में पानी के कृतिम स्रोत कम होने और पीने के पानी के उचित इंतजाम नहीं होने से वन्य प्राणी लगातार रहवासी इलाकों का रुख कर रहे हैं। जिसका एक नजारा शुक्रवार को जिला मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत अमेडा और बगदरा मार्ग के बीच बने नाले में देखने को मिला। जहां समीप जंगल से 3 चीतल पानी की तलाश में नाले के इर्द-गिर्द भटकते दिखाई दिए। बताया जा रहा है कि जंगल से नाले के पास पहुंचे तीन में से दो चीतल ग्रामीणों की आहट सुनकर वापस जंगल की ओर भाग गए, लेकिन उनमें से एक हिरण को अचेत हालत में ग्रामीणों ने पकड़ लिया। जिसे अमेड़ा के गांधी चौक स्थित माता मंदिर में बंद कर, ग्रामीणों ने मामले की सूचना तुरंत वन विभाग को दी।जहां सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम द्वारा देर रात्रि भीड़ कम होने के बाद चीतल का रेस्क्यू व उपचार के बाद उसे पुनः जंगल में छोड़ने की बात कही गई है ।
चीतल को देखने उमड़ा जनसैलाब
बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत अमेडा के माता मंदिर में उस वक्त लोगों का हुजूम लग गया जब कुछ ग्रामीणो ने नाले के पास से अचेत अवस्था में एक चीतल को पकड़कर मंदिर मे बंद कर दिया। जहा चीतल के पकड़े जाने की सूचना थोड़ी ही देर में जंगल में लगी आग की तरह अमेडा सहित आसपास के गांव में फैल गई, जहां अमेडा सहित आसपास के गांवों के लोगों का जनसैलाब चीतल को उमड़ पड़ा। जहा चीतल को देखने के लिए उमड़ी भारी भीड़ के चलते सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम को मंदिर में बंद चीतल का रेस्क्यू करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि चीतल पकड़े जाने की खबर मिलते ही भारी मात्रा में जनसैलाब चीतल को देखने के लिए उमड़ पड़ा जिसके चलते रेस्क्यू करने अमेडा पहुची वन विभाग टीम मध्य रात्रि तक चीतल का रेस्क्यू करने में नाकाम रही। वहीं रात्रि 12 बजे के बाद भीड़ कम होने पर चीतल का रेस्क्यू कर उसका उपचार करने के बाद उसे वापस जंगल में छोड़ने की बात रेस्क्यू टीम द्वारा कही गई है।
बगदरा के ग्रामीण चीतल को लेकर आए थे- मानक महाते
मामले को लेकर दूरभाष पर की गई चर्चा के दौरान ग्राम पंचायत अमेडा मरार माली समाज ग्राम अध्यक्ष मानक महाते ने बताया कि आज समीप के जंगल से तीन चीतल अमेडा और बगदरा के बीच स्थित नाले में आए थे, जिसमें से दो तो जंगल की तरह वापस चले गए, लेकिन अचेत अवस्था में एक चीतल को ग्रामीणो पकड़ लिया। जहां ग्रामीणों ने उसे गांधी चौक स्थित माता मंदिर में बंद कर दिया और इसकी सूचना अन्य ग्रामीणों को दी, जहां भीड़ बढ़ने पर उनके द्वारा वन विभाग को मामले से अवगत कराया गया है। उन्होंने आगे बताया कि चीतल जंगल से भटक कर गांव की तरफ क्यों आए थे इसकी जानकारी उन्हें नहीं है लेकिन ग्रामीण बता रहे हैं कि चीतल पानी की तलाश में गांव के नाले की तरफ आए थे ,जिसमें से एक चीतल अचेत हालत में ग्रामीणों के हाथ लग गया।
चीतल को वापस जंगल में छोड़ा जाएगा- धर्मेंद्र बिसेन
वही मामले को लेकर दूरभाष पर की गई चर्चा के दौरान रेंजर धर्मेंद्र बिसेन ने बताया कि ग्राम अमेडा से सूचना मिली थी कि ,उन्होंने एक चीतल को बेसुध अवस्था मे पकड़ा है।जिसे मंदिर में बंद कर रखा गया है। ग्रामीणों की सूचना पर वे अपने 5 साथियों के साथ मौके पर आए हैं, यहां ग्रामीणों की भीड़ इतनी अधिक है की उन्हें चीतल का रेस्क्यू करने में भारी परेशानी हो रही है। चीतल डरा हुआ है, यहां लगभग ढाई से तीन हजार ग्रामीण है। जिसके चलते चीतल अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है। जिसके चलते हमने फिलहाल चीतल रेस्क्यू नही किया है। ग्रामीणों को समझाने के बाद भी वे नहीं मान रहे हैं और भीड़ भी कम नहीं हो रही है जिसके चलते देर रात्रि 12 बजे के बाद भीड़ कम होने पर चीतल का रेस्क्यू किया जाएगा जिसका उपचार कर उसे वापस जंगल में सुरक्षित छोड़ा जाएगा।









































