पिता ने कहा- जी-जान लगाकर पुलिस में भर्ती होने तीन माह से तैयारी कर रहा था नरेंद्र

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पुलिस आरक्षक बनने जी-जान लगाकर तीन माह से तैयारी कर रहे नरेंद्र कुमार गौतम (22) की ग्राउंड टेस्ट में शामिल होने के बाद अचानक मौत की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। जिले के छपारा विकासखंड के केकड़ा गांव निवासी नरेंद्र अपने पिता शंकरलाल गौतम के सपने को पूरा करने और बड़े भाई स्व. जितेंद्र गौतम की इच्छा पूरी करने जी-तोड़ मेहनत कर रहा था।

नईदुनिया से चर्चा करते हुए पिता शंकरलाल गौतम ने बताया कि नरेंद्र को भरोसा था कि वह लिखित परीक्षा पास कर लेगा, इसलिए लिखित परीक्षा का परिणाम आने से पहले ही नरेंद्र ने शारीरिक परीक्षा की तैयार शुरू कर दी थी। गांव के स्कूल मैदान में नरेंद्र दौड़ लगाता था। कभी 10 तो कभी 25 राउंड दौड़ लगाने के बाद भी नरेंद्र को कभी किसी तरह की परेशानी नहीं आई। नरेंद्र शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ था।

खिसक गई पिता के पैरो तले जमीन

पुलिस में भर्ती होने की चाहत लेकर जबलपुर के रांझी एसएएफ मैदान पहुंचे नरेंद्र ने ग्राउंड-टेस्ट में 800 मीटर की दौड़ भी पूरी कर ली थी। इसके बाद ग्राउंड में तैनात पुलिस कर्मियों ने बताया कि नरेंद्र की हालत अचानक बिगड़ गई है और उसे रांझी अस्पताल ले जाया गया है। कुछ ही देर में बेटे की मौत की खबर सुनकर पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने और काबिल इंसान बनाने दिन-रात मेहनत कर पिता शंकरलाल गौतम खुद साइकिल में चलते है। जबकि बेटे को बाइक दिलाई थी। पिता के सपने को पूरा करने बेटे नरेंद्र ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।

नरेंद्र से थी परिवार को उम्मीदें

केकड़ा गांव निवासी नरेंद्र के पिता शंकरलाल गौतम ने बताया कि वे पहले गांव के सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में पढ़ाने जाते थे, लेकिन कोरोना के बाद विद्यार्थियों की दर्ज संख्या घटना के बाद वहां जाना बंद कर दिया है। खेती भी नाम मात्र की है। ऐसे में परिवार का गुजारा मजदूरी पर निर्भर है।करीब दो साल पहले नरेंद्र के बड़े भाई जितेंद्र गौतम (23) का अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी नरेंद्र के कंधों पर आ गई थी। पिता शंकरलाल गौतम व परिवार को नरेंद्र से बहुत उम्मीदें थी, लेकिन नरेंद्र की मौत से परिवार के सारे आरमान टूटकर बिखर गए। नरेंद्र की मौत से पूरा परिवार सदमे में है।

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