पुराना बैंक अकाउंट बन सकता है ‘जी का जंजाल’! बंद नहीं किया तो खाली हो सकती है आपकी जेब; आज ही चेक करें ये नियम

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अक्सर करियर की शुरुआत में या अलग-अलग स्कीम के लालच में हम कई बैंक अकाउंट खुलवा लेते हैं। पहली नौकरी का सैलरी अकाउंट, कैशबैक के लिए खुला जीरो बैलेंस खाता या किसी पुराने शहर का कोई जॉइंट अकाउंट समय के साथ ये खाते बस रिकॉर्ड में पड़े रह जाते हैं। कई लोगों को लगता है कि अगर खाते में पैसे नहीं हैं, तो उसे छोड़ देने में क्या बुराई है? लेकिन यहीं आप सबसे बड़ी गलती कर रहे हैं। एक ‘भूला हुआ’ बैंक अकाउंट आपके लिए न केवल आर्थिक बोझ बन सकता है, बल्कि भविष्य में आपके क्रेडिट स्कोर और सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।

पेनल्टी और चार्जेस का बोझ

पुराने खातों के साथ सबसे बड़ी समस्या मिनिमम बैलेंस (Minimum Balance) की होती है। अधिकांश सेविंग अकाउंट्स में एक निश्चित राशि रखना अनिवार्य होता है। यदि आप उस खाते को इस्तेमाल करना बंद कर देते हैं और बैलेंस न्यूनतम सीमा से नीचे चला जाता है, तो बैंक हर महीने पेनाल्टी काटना शुरू कर देता है। देखते ही देखते आपके जमा पैसे खत्म हो जाते हैं और कई बार बैलेंस निगेटिव में भी पहुंच जाता है। इसके अलावा, भले ही आप खाता इस्तेमाल न कर रहे हों, लेकिन बैंक सालाना डेबिट कार्ड (ATM) फीस और SMS अलर्ट चार्जेस काटता रहता है, जो आपकी जेब पर चुपचाप कैंची चलाते हैं।

डॉर्मेंट अकाउंट और कागजी सिरदर्दी

जब आप किसी खाते में लंबे समय (आमतौर पर 12 से 24 महीने) तक कोई लेनदेन नहीं करते, तो बैंक उसे ‘इनएक्टिव’ या ‘डॉर्मेंट’ (Dormant) घोषित कर देता है। एक बार खाता डॉर्मेंट हो जाने के बाद आप उससे न तो पैसे निकाल सकते हैं और न ही जमा कर सकते हैं। इसे दोबारा चालू कराना एक थकाऊ प्रक्रिया होती है, जिसमें आपको बैंक की शाखा में जाकर दोबारा KYC करानी पड़ती है और ढेर सारे फॉर्म भरने पड़ते हैं। अगर उस खाते में आपकी कोई पुरानी जमा पूंजी फंसी है, तो उसे निकालने के लिए आपको कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है।

लिंक्ड सर्विसेज और क्रेडिट स्कोर पर खतरा

खाता बंद करने से पहले यह जांचना बहुत जरूरी है कि वह कहीं किसी ऑटो-पेमेंट से तो नहीं जुड़ा है। अक्सर हमारे पुराने खातों से लोन की EMI, इंश्योरेंस प्रीमियम या म्यूचुअल फंड की SIP लिंक होती है। यदि खाता अचानक बंद हो जाए या उसमें बैलेंस न होने के कारण पेमेंट फेल हो जाए, तो इससे न केवल जुर्माना लगता है बल्कि आपकी क्रेडिट हिस्ट्री (CIBIL Score) पर भी बुरा असर पड़ता है। साथ ही, अगर आपके खाते में ओवरड्राफ्ट (Overdraft) की सुविधा है और उस पर कोई बकाया रह जाता है, तो बैंक उसे ‘अनपेड लोन’ की तरह ट्रीट करता है, जो आपके भविष्य के लोन मिलने की संभावनाओं को खत्म कर सकता है।

साइबर फ्रॉड का खतरा

जिस अकाउंट को आप चेक नहीं करते, वह साइबर अपराधियों के लिए सबसे आसान निशाना होता है। अगर आपका मोबाइल नंबर या ईमेल बदल गया है और आपने बैंक में उसे अपडेट नहीं किया है, तो आपको खाते से होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि का अलर्ट नहीं मिलेगा। ऐसे में अगर कोई आपके खाते का गलत इस्तेमाल करता है, तो आपको महीनों तक पता ही नहीं चलेगा। एक सक्रिय खाता हमेशा आपकी नजर में रहता है, जबकि पुराना पड़ा खाता किसी बड़े फ्रॉड का जरिया बन सकता है।

खाता बंद करने का सही तरीका क्या है?

सिर्फ एटीएम से पैसे निकाल लेना या बैलेंस जीरो कर देना खाता बंद करना नहीं कहलाता। इसके लिए आपको ये कदम उठाने चाहिए:

1. बैंक ब्रांच जाएं: संबंधित बैंक की शाखा में जाकर ‘अकाउंट क्लोजर फॉर्म’ भरें।

2. डेबिट कार्ड और चेकबुक: अपने पुराने डेबिट कार्ड और अप्रयुक्त चेकबुक को बैंक को सौंप दें या उन्हें नष्ट कर दें।

3. स्टेटमेंट डाउनलोड करें: खाता बंद करने से पहले पिछले 1-2 साल का स्टेटमेंट डाउनलोड कर लें, जो भविष्य में काम आ सकता है।

4. कंफर्मेशन लें: सबसे जरूरी बात, बैंक से खाता बंद होने की लिखित रिसीप्ट (Closure Advice) जरूर लें।

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