पुलिस की तीसरी आंख हुई कमजोर

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आधुनिकता की इस दौर में सीसीटीवी कैमरों की उपयोगिता किसी से छिपी नहीं है, लेकिन पुलिस की तीसरी आंख माने जाने वाले इन सीसीटीवी कैमरों से शहर की निगरानी नहीं हो पा रही है। चौक-चौराहों पर लगे अधिकतर सीसीटीवी कैमरे लंबे समय से धूल खा रहे हैं। पुलिस जानकारी के अनुसार, कोतवाली सहित भरवेली और नवेगांव थाना क्षेत्र की 50 लोकेशन में 203 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। 42 लोकेशन में लगे 165 कैमरे बंद पड़े हैं। यानी पुलिस किसी घटना की तह तक पहुंचने के लिए 8 लोकेशन में लगे सिर्फ 38 कैमरों के ही भरोसे है। कुछ कैमरे मेंटेनेंस के अभाव में बंद हैं, तो कुछ यूपीएस बैकअप के चलते, तो कई केबल कनेक्टिविटी के कारण बंद हैं। सीसीटीवी की बदहाली से पुलिस के आला अधिकारी भी वाकिफ हैं, लेकिन इस संबंध में अब तक किसी तरह के ठोस कदम नहीं उठाए जा सके हैं।

आपको बता दें कि इस साल अगस्त महीने में वारासिवनी में 7 साल के मासूम के अपहरण के मामले में पुलिस को सीसीटीवी कैमरों के जरिए कई अहम सुराग मिले थे। इसके अलावा शहर में होने वाली चोरी, लूट या अन्य आपराधिक मामलों की तह तक जाने के लिए सीसीटीवी कैमरों की ही मदद ली जाती है, लेकिन 165 कैमरों का लंबे समय से बंद रहना, पुलिस की जांच को भी प्रभावित कर रहा है। पुलिस के आला अधिकारी भी ये मानते हैं कि सीसीटीवी कैमरों के बंद रहने से जांच में कठिनाइयां होती हैं। इस संबंध में पुलिस विभाग की रेडियो शाखा और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा मुख्यालय से पत्राचार किया जा रहा है। आपको बता दें कि लंबे समय से बंद रहने के कारण इन सीसीटीवी कैमरों की फाइबर पूरी तरह खराब हो चुकी है।

दरअसल, बालाघाट शहरी क्षेत्र के अलावा सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनके मेंटेनेंस का काम अंतरराष्ट्रीय कंपनी हनीवेल के पास था, लेकिन जुलाई माह में अनुबंद खत्म होने के बाद इसकी जिम्मेदारी टेक्नोसिस कंपनी को दी गई थी। टेंडर मिलने के बाद कंपनी के कर्मचारियों द्वारा शहर के सीसीटीवी कैमरों में सुधार कार्य किया गया था, लेकिन पिछले छह महीने से अधिक वक्त से कैमरों के मेंटेनेंस का काम बंद है। आपको बता दें कि सीसीटीवी कैमरों के फुटेज के आधार पर पुलिस ने कई अहम प्रकरणों को सुलझाया है, लेकिन कैमरे बंद होने के कारण पुलिस को घटना स्थल के आसपास दुकानों के सामने लगे कैमरों की मदद लेनी पड़ती है।

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