पदमेश न्यूज़, बालाघाट।नगर के वार्ड नंबर 33 गायखुरी स्थित सरदार पटेल मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल, पिछले कुछ दिनों से जमकर सुर्खिया बटोर रहा है।जहा पिछले माह उपचार के दौरान गलत इंजेक्शन लगाने से एक युवक के कोमा में चले जाने वाले आरोप का मामला अभी थमा भी नहीं था, कि अब 20 मार्च शुक्रवार को इसी अस्पताल से एक नया विवाद सामने आया है।जहां मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए, मामले में इंसाफ दिए जाने की गुहार लगाई है। परिजनों ने उपचार के दौरान मरीज की मौत होने पर ,बकाया राशि के लिए,अस्पताल प्रबंधन द्वारा डेडबॉडी को जप्त किए जाने का आरोप लगाया है।परिजनों का आरोप है कि मारपीट में घायल हुए युवक को उपचार के लिए सरदार पटेल मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में भर्ती कराया था, भर्ती करने के दौरान अस्पताल प्रबंधन द्वारा आयुष्मान कार्ड से युवक का नि:शुल्क उपचार किए जाने की बात कही गई थी,वही ऑपरेशन के नाम पर 10,000 रु जमा कराए गए थे।लेकिन बाद में अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान कार्ड से इलाज ना होने की जानकारी दी और ऑपरेशन व दवाईयो के नाम पर 50,000 रु की राशि वसूल कर ली।मृतक के परिजनों का आरोप है कि मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा करीब 1लाख रु जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है, वहीं रुपए जमा न करने पर डेड बॉडी जप्त कर ली गई है,जो परिजनों को नही दी जा रही है।परिजनों ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा उपचार की संपूर्ण राशि न मिलने तक डेड बॉडी नहीं दिए जाने की बात कही जा रही है।हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपो को झूठा व बेबुनियाद बताते हुए डेड बॉडी परिजनों की जगह पोस्टमार्टम के लिए पुलिस को सौंपे जाने की बात कही है।
शराब के नशे में मजदूरों के बीच हुई मारपीट में घायल हुआ था, संदीप
मामला रूपझर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम घोंदी के जंगल का बताया गया है,जहा ट्रक में हमाली के काम से जंगल मे लकड़ी भरने गए ग्राम नारंगी निवासी 26 वर्षीय मजदूर संदीप पिता बुधराम मरकाम को शराब के नशे में किसी बात को लेकर हुए विवाद में उसी के साथी मजदूर अर्जुन पिता पवन सिंह टेकाम ने, लाठी डंडों से मारकर उसे गम्भीर रूप से घायल कर दिया।जिसे उसके परिजनों द्वारा 18 मार्च की देर रात जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया था, जहां संदीप का प्राथमिक उपचार कर जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने उसे बेहतर उपचार के लिए रिफर कर दिया था। जिसके परिजनों द्वारा संदीप को गायखुरी स्थित सरदार पटेल कॉलेज में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था।जहां उपचार के दौरान 19 मार्च की अलसुबह उसकी मौत हो गई।
पहले आयुष्मान कार्ड से नि:शुल्क उपचार की कही बात, बाद में कहा लगेगा पूरा पैसा
मृतक के परिजनों का आरोप है जिला अस्पताल से रिफर कर,वे संदीप को बेहतर उपचार के लिए गायखुरी स्थिति सरदार पटेल कॉलेज लेकर आए थे जहां भर्ती करने के पूर्व उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को इस बात की जानकारी दे दी थी कि उनके पास में पैसे नहीं है, वही आयुष्मान कार्ड से संदीप का नि:शुल्क उपचार किए जाने का निवेदन किया था।जिसपर अस्पताल प्रबंधन द्वारा सहमति जताते हुए आयुष्मान कार्ड से सम्पूर्ण उपचार नि:शुल्क किए जाने की बात कहते हुए संदीप को भर्ती कराया गया था,परिजनों ने बताया कि 18 मार्च को ऑपरेशन के नाम पर 10,000 रु अस्पताल प्रबंधन द्वारा जमा कराए गए थे तो वही ऑपरेशन में लगने वाली दवाइयां और एक्सरे, सिटी स्कैन, जांच सहित अन्य ट्रीटमेंट के नाम पर अलग से 11000 वसूल किए गए थे।परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा पहले तो नि:शुल्क उपचार की बात कहते हुए मरीज को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया और बाद में आयुष्मान कार्ड नहीं चलेगा, कहकर ऑपरेशन और दवाइयां खर्च सहित एक से डेढ़ लाख रुपए की मांग करने लगे। अब मरीज की मौत होने पर उन्हें डेड बॉडी भी नहीं की जा रही है।
अस्पताल वाले बोले पहले पूरे पैसों दो, नहीं दोगे तो डेड बॉडी नही मिलेंगी- रंजीत
मृतक संदीप के छोटे भाई रंजीत मरकाम ने बताया कि 18 मार्च की रात्रि करीब 2 बजे उन्होंने अपने भाई संदीप को उपचार के लिए सरदार पटेल कॉलेज में भर्ती कराया था, उस समय संदीप का आयुष्मान कार्ड से नि:शुल्क उपचार किए जाने की बात कही गई थी अस्पताल प्रबंधन को बता दिए थे कि हमारे पास पैसे नहीं है।अस्पताल वालो ने भी आयुष्मान कार्ड से नि:शुल्क उपचार की बात कहते हुए संदीप को भर्ती कर लिया था, लेकिन तरह-तरह की जांच और ऑपरेशन के नाम पर पहले 10,000रु काउंटर में जमा करवा लिए थे, जो उन्होंने ऑनलाइन ट्रांसफर किए हैं। ऑपरेशन होने के बाद दवाइयां सहित अन्य खर्च के नाम पर करीब 11000 रु जमा कराए गए। लेकिन संदीप की 19 मार्च की सुबह उपचार के दौरान मौत हो गई, भाई की मौत की जानकारी अस्पताल प्रबंधन द्वारा उन्हें दी गई, वहीं उपचार के खर्च के रूप में 1 लाख रु की राशि मांगी जा रही है। उन्होंने बताया कि भाई की मौत के बाद 15-15 हजार करके दो बार उन्होंने 30,000 रु दवाइयो के लिए दिया है इस तरह अब तक कुल 50,000 रु खर्च कर चुके हैं।अब उनके पास पैसे नहीं है लेकिन अस्पताल वाले बोल रहे हैं कि जब तक पूरा पैसा नहीं मिलेगा तब तक भाई की डेड बॉडी भी नहीं देंगे।
ब्रेन सर्जरी का आयुष्मान से उपचार की जिले में कहीं भी नहीं है सुविधा- वर्मा
सरदार पटेल मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के न्यूरो सर्जन डॉ वर्मा ने बताया कि जब मरीज को उपचार के लिए लाया गया था, तब वहा बेहोश था,उसकी बॉडी रिस्पांस नहीं कर रही थी, हमने एक्सरे, सीटी स्कैन कराकर, ब्लड टेस्ट कराया अन्य जांचे कराई और ऑपरेशन करने के लिए कहा, हमने पहले ही मरीज के परिजनों को बता दिया था कि मरीज की ब्रेन सर्जरी करनी पड़ेगी और ब्रेन सर्जरी का उपचार आयुष्मान कार्ड से नहीं होगा। क्योंकि ब्रेन सर्जरी, हार्ड लिवर किडनी के आयुष्मान कार्ड से उपचार के लिए किसी भी अस्पताल को परमिशन नहीं है।क्योंकि इसके लिए रोग सम्बंधित विशेषज्ञ चिकित्सक का रजिस्ट्रेशन आयुष्मान कार्ड के तहत सरकार के पास कराना अनिवार्य होता है। हमारे अस्पताल में आयुष्मान कार्ड के जरिए ब्रेन सर्जरी कि नि:शुल्क नहीं है इस बात की जानकारी परिजनों को दे दी थी, उसके बाद ही मरीज को भर्ती कराया गया था और महज10,000रु में उनका ऑपरेशन किया गया। यहां सवाल, पैसों का नहीं, बल्कि मरीज की जान बचाने का था। लेकिन उपचार के दौरान मरीज की मौत हो गई।
सभी आरोप झूठे है, पेसो के लिए नही रोकी गई डेडबॉडी-
उधर अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपो को झूठा व बे-बुनियाद बताते हुए सभी आरोपो को सिरे से खारिज कर दिया है।उन्होंने बताया कि मारपीट वाले या फिर पुलिस से संबंधित जो भी मामले होते हैं उसकी जानकारी सबसे पहले थाने में दी जाती है।18 मार्च को जब मरीज को यहां भर्ती कराने लाया गया था तब भी मामले की सूचना हमने पुलिस को दी थी और जब मरीज की मौत हो गई है तो इसकी सूचना भी हमने पुलिस को दी है। जब तक पुलिस कार्यवाही नहीं होती, तब तक डेड बॉडी हम नहीं देंगे।क्योंकि मृतक के शव का पोस्टमार्टम होना है जो जिला अस्पताल में होगा। इसीलिए शव परिजनों को ना देते हुए पुलिस को दिया जाएगा। ताकि नियमों के तहत आगामी कार्रवाई हो सके। उन्होंने बताया कि यहां पर पैसे का कोई मामला नहीं है, आयुष्मान कार्ड से उपचार नहीं होगा यह जानकारी पहले ही परिजनों को दी गई थी, और महज 10,000रु में मरीज का ऑपरेशन किया गया है, पैसों के लिए डेडबॉडी नहीं रोकी गई है बल्कि डेडबॉडी पुलिस को सौंप जाएगी और पुलिस पोस्टमार्टम कराकर वहां डेड बॉडी परिजनों को सौपेगी। उन्होंने आगे बताया कि मेडिकल का चार्ज बचा हुआ है वहीं अस्पताल के भी कुछ चार्ज पेंडिंग पड़े हैं वह चार्ज परिजनों से लेना है या नही ,या इस मामले में क्या करना है।इसका फैसला प्रबंधन द्वारा किया जाएगा।








































