पदमेश न्यूज़, बालाघाट।यदि आपने, अपने किसी परिजन को इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया है और आप उस मरीज को जिला अस्पताल में भर्ती कराकर उसका इलाज करवाना चाहते है तो आपको वो सब कुछ करना पड़ेगा जो काम अस्पताल के कर्मचारियों का है। ऐसे मामले में आप अस्पताल के किसी कर्मचारी से सहयोग की उम्मीद ना रखे तो बेहतर है।यह बात हम नहीं कह रहे हैं बल्कि इसके नजारे जिला अस्पताल में आए दिनों देखने को मिल रहे हैं ।क्योंकि जिला अस्पताल में आने वाले लोगों को अपने मरीज को भर्ती कराने के लिए खुद ही स्ट्रेचर में लेंटाना पड़ता है खुद ही इस स्ट्रेचर को खींचते हुए वार्ड में ले जाना पड़ता है और खुद ही खाली पलंग ढूढ़कर उस पलंग में बेडशीट आदि बिछानी पड़ती है।क्योंकि पिछले कई दिनों से जिला अस्पताल के ऐसे ही हालात बने हुए हैं।जहा मरीज के परिजनों को ही वार्डबॉय का काम करते देखा जा रहा है।
परिजन स्वयं ही स्ट्रेचर खींचने को हो रहे मजबूर
ग्रीष्मकालीन सीजन शुरू होते ही जिला अस्पताल में विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या बढ़ गई है,ऐसे में जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को जिला अस्पताल में बेहतर सुविधा नहीं मिल पा रही है।हालात यह है कि मरीज के परिजनों को स्वयं ही स्ट्रेचर खींचने को मजबूर होना पड़ रहा है वहीं स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा केवल एक ही जवाब दिया जा रहा है कि कर्मचारियों की कमी होने की वजह से यह सब समस्या आ रही है।ज्ञात हो कि प्रशासनिक स्तर से जिला अस्पताल की अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयास नजर आते हैं जबकि मरीजों को मिलने वाली आकस्मिक सुविधाएं आज भी मरीजों तक नहीं पहुंच पा रही हैं
आए दिन अस्पताल का होता है निरीक्षण, पर समस्या जस की तस
उधर जिला प्रशासन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में तो, इधर कर्मचारी व्यवस्थाओं को बिगाड़ने में जुटे हैं
बात अगर जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं की करें तो जिला अस्पताल की व्यवस्था और वहां मिलने वाली सुविधाए किसी से छुपी नहीं है।प्रशासनिक अधिकारी आए दिनो, जिला अस्पताल का निरीक्षण कर यहां की सुविधाएं पहले से और अधिक बेहतर बनाने में जुटे है तो वहीं दूसरी ओर आए दिन नजर आ रहे यह नजारे अस्पताल प्रबंधन और यहां की गई व्यवस्थाओं की पोल खोलते नजर आते हैं।ज्ञात हो कि पूर्व में एक मरीज को स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराने के मामले में 5 एएनएम पर एक वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई हुई थी।लेकिन कार्यवाही के बावजूद इसके जिला अस्पताल के भीतर की व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है, वही आए दिनों लोगो को अपने मरीज को वार्ड में भर्ती कराने के लिए स्ट्रेचर खीचते देखा जा रहा है।अक्सर सड़क दुर्घटना में घायल हुए लोगों के परिजन ही स्ट्रेचर खींचते दिखाई देते है।वही पूरे जिला अस्पताल में कहीं वार्ड बाय दिखाई नहीं देते। यह नजारे, पिछले कुछ दिनों से जिला अस्पताल में रोज नजर आ रहे है।
वर्षों से चली आ रही परंपरा, अब भी कायम कार्यवाही का नहीं है डर
शुक्रवार को अलग-अलग घटनाओं में गंभीर रूप से घायल, या बीमार हुए लोगों को जिला अस्पताल में भर्ती कराने के लिए एंबुलेंस 108 से लाया गया था जिन्हें एंबुलेंस से उतारकर डॉक्टर के पास ले जाने और उन्हें वार्ड में जाकर शिफ्ट कराने की जिम्मेदारी वहां के वार्ड बॉय और संबंधित स्टाफ की थी लेकिन देखने में यह आया कि लोग अपने मरीजों को खुद स्ट्रेचर में डालकर स्ट्रेचर खुद घसीटते हुए नजर आए ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब जिला अस्पताल में मरीजों को स्ट्रेचर में ले जाने की जिम्मेदारी वहां के वार्ड बॉय और संबंधित स्टाफ को दी गई है तो फिर परेशान होकर अस्पताल में आ रहे मरीजों के परिजनों से स्ट्रेचर क्यों खिंचवाया जा रहा है सवाल यह भी है की पूर्व में कार्यवाही होने के बाद भी जिला अस्पताल की व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं आ रहा है और सबसे बड़ा सवाल यह है कि मामले का संज्ञान लेने के बाद क्या प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दोबारा इस पर कार्यवाही की जाएगी या फिर वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी।
भर्ती मरीजों को भी नही मिलती वार्डबॉय की सुविधा
वैसे तो जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर मरीजों की हमेशा ही शिकायत रही है।जिसका समाधान आज तक ना तो प्रबंधन और ना ही प्रशासन कर पाया है।अक्सर देखा जाता है कि गम्भीर अवस्था मे मरीज को इलाज के लिए जिला अस्पताल लाने पर, चिकित्सकों के द्वारा घायल को मेडिकल वार्ड में भर्ती करने की सलाह दी जाती है।कर्मचारियों द्वारा मरीज के परिजन को स्ट्रेचर तो उपलब्ध करा दिया लेकिन परिजनों से ही स्ट्रेचर खिंचवाया जाता है।मजबूरी में परिजनों को ही स्ट्रेचर खींचकर मेडिकल वार्ड तक मरीज को ले जाना पड़ता है।जिसके बाद भी लापरवाही का सिलसिला खत्म नही होता।कई बार एक्सरा कराने के लिए परिजनों को खुद स्ट्रेचर पर मरीज को ले जाना पड़ता है, वही एक्सरा के बाद परिजन पुनः स्ट्रेचर खींचते हुए मेडिकल वार्ड तक अपना मरीज वापस लेकर आते है।
जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में नहीं आ रहा सुधार
जिला अस्पताल पर प्रशासनिक अधिकारियों की पैनी नजर होती है इसके बावजूद भी मरीज के परिजन इलाज के लिए दिक्कत उठाते हैं इस हालत का जिम्मेदार जिला अस्पताल प्रबंधन की लचर व्यवस्था को माना जा सकता है।प्रशासनिक अधिकारियों के बार-बार निरीक्षण का भी असर भी नहीं पड़ रहा है और आए दिनों ऐसे नजारे अस्पताल में देखने को मिल जाते हैं। कई बार शिकायत करने के बाद भी जिला अस्पताल की व्यवस्था में सुधार आता नहीं दिख रहा है
मरीजो के परिजनों को ही करना पड़ता है सभी काम- महेंद्र उपवंशी
स्टेचर पर मरीज को बैठक इधर उधर लाना ले जाना कर रहे मरीज के परिजन महेंद्र उपवंशी ने बताया कि यहां पर वार्ड बॉय नहीं है मरीज को स्वयं ही लाना ले जाना पड़ता है,केवल हम ही नहीं बल्कि अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों के परिजन, अपने अपने मरीजों को स्ट्रेचर पर इधर से उधर लाना ले जाना करते हैं। यहां तक की चिकित्सक के पास, व एक्सरे रूम में भी लाने ले जाने का काम मरीजों के परिजनों को ही करना पड़ता है।
स्ट्रेचर खिंचने कोई वार्डबॉय नही आता-भीमराव कोहरे
वही मरीज के परिजन भीमराव कोहरे ने बताया कि यहां वार्ड बॉय की सुविधा नहीं है।एक साहब आए थे बोले कि स्ट्रेचर पर बैठकर मरीज को वार्ड में ले जाओ, तो हम लोग अपने मरीज को स्ट्रेचर में बैठाकर वार्ड के भीतर आए हैं। यहां सभी लोग ऐसा कर रहे हैं किसी को भी वार्ड बाय नहीं मिला है।
यदि ऐसा है तो कार्यवाही की जाएगी-जैन
इस पूरे मामले को लेकर की गई चर्चा के दौरान सिविल सर्जन डॉ निलय जैन ने बताया कि जिला अस्पताल में पर्याप्त वार्ड बॉय, गार्ड और अन्य कर्मचारी हैं।जिन्हें इन कामों के लिए रखा गया है वही व्हीलचेयर, व स्ट्रेचर भी हमारे पास में पर्याप्त है।जिसे जगह-जगह रखवाया गया है,जब कभी मरीज अस्पताल आता है तो वार्ड बाय, गार्ड या फिर सम्बधित स्टाफ, सट्रेचर लेकर मरीज तक पहुंच जाते हैं और मरीजों की पूरी मदद करते हैं। कई बार परिजन जब मरीज को जब अस्पताल आते है तो वे स्वयं ही स्ट्रेचर में मरीज को बैठाकर ,खुद ही स्ट्रेचर खींचते हुए डॉक्टर के पास लाते हैं ताकि मरीज को जल्द से जल्द प्राथमिक उपचार मिल सके। वह ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि वह भावात्मक रूप से मरीज से जुड़े होते हैं। वह तुरंत प्राथमिक उपचार करना चाहते हैं इसीलिए कई बार परिजन खुद ही सहयोग करते हैं।हमारे पास पर्याप्त वार्ड बॉय की व्यवस्था है यदि बाय परिजनों से स्ट्रेचर खिंचवाते हैं या व्हीलचेयर ,व स्ट्रेचर खींचने के लिए कहते हैं तो यह गलत है यदि ऐसा है तो नामजद शिकायत मिलने पर सम्बधितों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।








































