भतीजे की हत्या करने के आरोप में बुआ को 7 वर्ष की सश्रम कारावास- 1000 रुपए अर्थदंड

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बालाघाट एक से 23 वर्षीय लड़की को अपने 6 माह के मासूम भतीजे की कुल्हाड़ी से मारकर हत्या करने के आरोप में 7 वर्ष की सश्रम कारावास और 1000 रुपये से दंडित किया गया। यह घटना किरनापुर थाना क्षेत्र में आने वाले ग्राम कलकाता की है। जहां पर कुमारी सुखवती पिता लाल सिंह नामूर्ते 23 वर्ष ने उक्त वारदात घटित की थी विद्वान सत्र न्यायाधीश दिनेश चंद थपलियाल की अदालत ने अभियुक्ता को धारा 302 बहादुरी के तहत अपराध में दोष मुक्त करते हुए उसे धारा 304 में दोषी पाते हुए उपरोक्त सजा से दंडित किए।

अभियोजन के अनुसार सोनसिह नामूर्ते और जयवंती आपस में पति-पत्नी है और सुखवत्ती के भाई और भाभी है जिनका पंकज उनका बेटा था। 4 फरवरी 2022 को जयवंती का पति सोनसिह बास कटाई करने सीतापाला गया था और उसके सास ससुर खेत में काम करें चले गए थे। देवर सुखराम स्कूल चला गया था और ननंद सुखवंतीऔर बेटा पंकज 6 वर्ष घर में थे। 12:00 बजे करीब पंकज बीच वाले कमरे में सो रहा था उस समय जयवती घरेलू काम कर रही थी। पंकज उठने के बाद जोर जोर से रोने लगा था तभी सुखवंती ने जोर-जोर से क्यों रोता है कह कर पंकज को कुल्हाड़ी से मारने लगी जयवंती के देखने पर सुखवती कुल्हाड़ी लेकर उसके पीछे भी मारने दौड़े तब वह भागी। कुछ देर बाद, जयवंती ने आकर देखी उसके बेटे पंकज के गले में दाहिनी तरफ कुल्हाड़ी के चार जगह एवं दाहिने कान पर चोट के निशान थे ।जहां से खून निकल रहा था ।घायल पंकज को तुरंत ही किरनापुर के अस्पताल में भर्ती किए थे जहां से उसे उपचार के बाद जिला अस्पताल बालाघाट रिफर किया गया था जिला अस्पताल की चिकित्सक ने बालक पंकज को मृत घोषित कर दिए। मर्ग जांच उपरांत सुखवती के विरुद्ध धारा 302 भादवि के तहत अपराध दर्ज कर उसे इस अपराध में गिरफ्तार करने के बाद विद्वान अदालत में अभियोग पत्र पेश किया गया था। विद्वान सत्र न्यायधीश दिनेश चंद थपलियाल की अदालत में चलते इस मामले में अभियोजन पक्ष इस आरोपी सुखवती के विरुद्ध धारा 304 भादवि के तहत आरोपित अपराध सिद्ध करने में सफल रहा। जिसके परिणाम स्वरूप विद्वान अदालत ने मामले की समस्त परिस्थितियों को देखते हुए सुखवती को धारा 302 भादवी के तहत आरोपित अपराध से दोषमुक्त करते हुए उसे धारा 304 भादवि के तहत अपराध में 7 वर्ष की सश्रम कारावास और1000 रुपए अर्थदंड से दंडित किए इस मामले में शासन की ओर से लोक अभियोजक मदन मोहन द्विवेदी द्वारा पैरवी की गई थी।

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