मतदाता सूची बढ़ा रही प्रत्याशियों की चिंता,भ्रमित कर रही मतदाता सूची ?

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राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और नगर पालिका चुनाव एक साथ किए जा रहे हैं उसमें भी पहले पंचायत चुनाव और उसके बाद नगरी निकाय चुनाव हो रहे हैं जिसकी वजह से नगर पालिका चुनाव में मतदाताओं कि मतदान का समीकरण गड़बड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

दरअसल पूरा मामला शहर की मतदाता सूची में गड़बडाता हुआ दिखाई दे रहा है। इस सूची पर गौर किया जाए तो ऐसा लगता है कि जैसे बरसों से इसका अपडेशन नहीं हुआ है क्योंकि इस सूची में उनका भी नाम है जो स्वर्ग सिधार चुके हैं और उनका भी नाम है जो बालाघाट ही नहीं है। इस सूची में उसका भी नाम है जो देश से बाहर विदेश जा चुके हैं या फिर इस सूची में उनके भी नाम दिखाई देते हैं जिनके नाम ग्रामीण क्षेत्रों की मतदाता सूची में भी है।

दरअसल नगरी निकाय चुनाव के लिए बालाघाट नगर पालिका के 33 वार्ड ने प्रत्याशियों द्वारा अपने अपने वार्ड के प्रत्याशियों की सूची तैयार करने के दौरान इस बात की जमकर माथापच्ची हो रही है कि फला व्यक्ति तो स्वर्ग सिधार चुका है अमुक व्यक्ति का पूरा परिवार इंडिया से बाहर जा चुका है या फिर यह व्यक्ति वर्षो पहले स्थानांतरण होकर बालाघाट से अन्यत्र जा चुका है। यही नहीं ऐसी महिला मतदाताओं की संख्या भी बहुत अधिक है जो विवाह के पश्चात अपने ससुराल जा चुकी है, फिर भी उनका नाम मतदाता सूची में वर्षों से बालाघाट में शोभायमान हो रहा है।

शहर के अधिकांश वार्ड में यही स्थिति बनी हुई है मतदाता सूची के अनुसार जिस वार्ड में मतदाताओं की संख्या 4000 है वहां पर मैदानी स्तर पर हकीकत में मतदाताओं की संख्या 32 सौ से 35 सौ ही पहुंच पा रही है।

आपको बता दें कि पंचायत चुनाव और नगरी निकाय चुनाव साथ-साथ होने की वजह से भी मतदाता सूची और वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के लिए असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि जिन मतदाताओं के नाम बालाघाट के विभिन्न वार्डो में है उनके नाम ग्रामीण क्षेत्रों में भी हैं। और ग्रामीण क्षेत्र के दो चरण के चुनाव 1 जुलाई तक पूरे हो चुके हैं और उनमें से बहुत से लोगों ने मतदान ग्रामीण क्षेत्र में जाकर कर चुके हैं। और रही सही कसर 8 जुलाई को होने वाले तीसरे चरण के पंचायत चुनाव में पूरी हो जाएगी। ऐसे लोग 13 जुलाई को होने वाले बालाघाट के नगर पालिका चुनाव में अपने मतों का प्रयोग नहीं कर पाएंगे।

इन सब कारणों की वजह से चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे और मतदान के आंकड़ों पर गुणा भाग कर रहे वार्ड पार्षद प्रत्याशियों के माथे पर चिंता की लकीरें और परेशानी स्पष्ट दिखाई दे रही है। मतदाता सूची के अनुसार जो आंकड़ा और मतदान का प्रतिशत और अपने पक्ष में होने वाले मतदान की उम्मीद लगा रहे थे उन सब में बदलाव करना पड़ रहा है और नई रणनीति तैयार करनी पड़ रही है।

गौरतलब रहे कि यह सब देखें वार्ड प्रत्याशी से लेकर मतदाता सूची का अध्यन करने वाले हर कोई व्यक्ति यही चर्चा कर रहे हैं कि इस मतदाता सूची का बारीकी से अध्ययन करना और उसमें बदलाव करने की बहुत अधिक जरूरत है। मतदाता सूची के अनुसार भले ही 76000 मतदाता शहरी क्षेत्र में हो, लेकिन हकीकत और धरातल पर देखा जाए तो यह आंकड़ा 70000 के पास भी नहीं पहुंच पाएगा?

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