मनरेगा की मजदूरी नहीं मिलने से मजदूर परेशान

0

वारासिवनी(पद्मेश न्यूज)। वारासिवनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायतों में मनरेगा में मजदूरी कार्य करने वाले मजदूरो का समय पर भुगतान नहीं होने से वह परेशान नजर आ रहे हैं। यह स्थिति वारासिवनी ही नहीं पूरे जिले की बताई जा रही है, परंतु समय रहते भुगतान नहीं होने से मजदूरों को काफ ी संघर्ष करना पड़ रहा है। यह भुगतान बीते करीब २ महीने से प्राप्त नहीं हुआ है जिस कारण से होली जैसा त्योहार उन्हें अभाव में बनाना पड़ा। वहीं दूसरी तरफ कार्यों के मूल्यांकन में प्रतिदिन मजदूरी २४३ रूपये की जगह १०० रूपये,५०,१५० रुपये प्रतिदिन की दी जा रही है। ऐसे में मनरेगा जैसी शासन की महत्वाकांक्षी योजना से मजदूरों का मोह भंग होता नजर आ रहा है। जिनके द्वारा परेशान होकर महानगरों की ओर पलायन करने की योजना बनाई जा रही है तो वहीं पर्व के दौरान किए गए कर्ज को चुकाने के लिए दूसरे स्थान पर मजदूरी की जा रही है। जिनके द्वारा शासन प्रशासन से जल्द उनकी मजदूरी का भुगतान करने की मांग की जा रही है।
प्रदेश सरकार की मनरेगा महत्वकांक्षी योजना है से मजदूरों में आक्रोश
देश और प्रदेश सरकार की मनरेगा योजना पंचायत स्तर पर महत्वकांक्षी योजना है। जिसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को १०० दिवस की मजदूरी उपलब्ध कराने का कार्य किया जाता है। जिसे पलायन रोकने में सरकारों के द्वारा उपयोग किया जा रहा है ,परंतु वर्तमान में यह योजना ग्राम पंचायत सहित मजदूरों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। जिसके माध्यम से ग्राम पंचायत के द्वारा ग्राम में विभिन्न कार्य करवाए गए है। जिसकी शासन के पोर्टल पर मजदूरों की उपस्थिति दर्शा दी गई है जहां से मजदूरों का भुगतान किया जाना था। परंतु दिसंबर महीने के आखिरी समय से वर्तमान तक विभिन्न पंचायत में किए गए कार्यों का भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे में मजदूरों के द्वारा होली पर्व के दौरान भुगतान की राह देखी जा रही थी। परंतु इंतजार के साथ पर्व भी खत्म हो गया यह पर्व लोगों को उधारी और कर्ज लेकर मानना पड़ा। जिनके द्वारा लगातार ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, ग्राम प्रधान और पंच के मकान एवं कार्यालय के लगातार चक्कर लगाते रहे एवं वर्तमान में भी लगा रहे हैं। किंतु किसी के पास संतोषजनक जवाब नहीं है वहीं इस दौरान बताया जा रहा है कि ईएमबी एक नया पंचायत में आया है जिसके माध्यम से मनरेगा के कार्यों का मूल्यांकन किया जा रहा है। जिसमें मजदूरों को ४० से १५०, २०० रुपये प्रति व्यक्ति की मजदूरी बन रही है जबकि योजना में २४३ रुपये प्रति व्यक्ति की मजदूरी निर्धारण है। इसको लेकर भी ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है जो मनरेगा को छोडक़र अब महानगरों की ओर जा रहे है। वहीं वह लोग शासन प्रशासन से अपने भुगतान को जल्द देने की मांग कर रहे हैं।

पंचायत में मनरेगा तकलीफ की योजना बन गई है-सुनील राणा

सरपंच प्रतिनिधि सुनील राणा ने बताया कि मनरेगा प्रदेश जिले में ग्राम पंचायत के लिए तकलीफ की योजना हो गई है। १ जुलाई २०२४ के पहले यह योजना ठीक थी लेकिन सरकार ने बजट कम किया तो ग्राम में मजदूरी के भुगतान मनरेगा के काम बहुत कम हो गए हैं। सामग्री के काम खत्म हो चुके हैं आए दिन पंचायत में जो मजदूर काम करते हैं उन्हें लंबे समय तक भुगतान नहीं हो रहा है। अब तो मजदूर भी काम करना पसंद नहीं कर रहे है इनके द्वारा ईएमबी लाया गया है जिसमें काम का मूल्यांकन होता है। इसमें समस्या है की मजदूरी योजना में २४३ का रेट है परंतु इसके कारण कभी ४०,५०,१५० रुपये प्रतिदिन का भुगतान मजदूरों को होना है। मनरेगा में मजदूर का रुझान नहीं है यह योजना परेशानी का कारण बनी हुई है होली के पहले का भुगतान नहीं हुआ। जिस कारण मजदूरों में आक्रोश कर वह पंच और प्रधान पर अपना आक्रोश दिखा रहे हैं।

मजदूर काम कर रहा है शासन समय पर भुगतान नही दे रही है-सूर्यभान पूसाम

वारा सरपंच सूर्यभान सिंह पूसाम ने बताया कि शासन प्रशासन कहते है कि ग्रामीण क्षेत्र से मजदूरों का पलायन नहीं होना चाहिए। उसे रोकने के लिए कार्य करवाए जाते हैं उल्टा अभी जो किए गए काम थे उसका भुगतान दिसंबर के बाद से नहीं आया है। मजदूर भटक रहा है त्योहार उसने ऐसे ही निकाल दिया जबकि इस तरफ शासन को ध्यान देना था कि भुगतान और कार्य जिससे मजदूरों की रोजी रोटी चलती है वह निरंतर चलता रहे। ताकि मजदूर पलायन ना करें किंतु इस कारण से लोग अब बाहर जा रहे हैं बाद में शासन प्रशासन बोलेगा कि यह रोका जायें परंतु यह तो समस्या बन रही है मजदूर काम कर रहा है तो समय में भुगतान नही हो रहा है। यदि समय पर भुगतान होगा तो मजदूर काम करेगा पिछली बार हमारे यहां दो तीन काम का मूल्यांकन हुआ जो इंजीनियर सहित अधिकारियों ने आकर किया था। उसमें देखे तो काम के हिसाब से १२५ से १५० रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिली है। जबकि शासन का नियम २४३ रूपये देने का है यह लोग लगातार पंचायत और जनप्रतिनिधि के चक्कर लगा रहे हैं। होली के समय भी आए थे अब हमारे पास भी जितना हो सका हमने लोगों को व्यवस्था बनाने का कार्य किया परंतु कई लोगों ने कर्ज में होली मनाये हैं इस पर ध्यान देना चाहिए।

इनका कहना है

दूरभाष पर चर्चा में बताया कि मनरेगा में मजदूरी कार्य करने वाले मजदूरों का भुगतान पिछले कुछ समय से नहीं हुआ है। यह समस्या अकेले वारासिवनी विकासखंड कि नहीं पूरे जिले और प्रदेश की है ,जैसे ही शासन स्तर से राशि दी जाएगी हर मजदूर के खाते में मजदूरी पहुंच जायेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here