प्रदेश के उमरिया स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बने एक रिसोर्ट के अंदर मादा तेंदुए ने तीन शावकों को जन्म दिया। इसकी जानकारी मिलते ही वन विभाग का अमला सक्रिय हो गया और रिसोर्ट के अंदर हाथी दल को भेजा गया। हाथी दल ने भी वहां से लौटने के बाद इस बात की पुष्टि कर दी कि रिसोर्ट के अंदर मादा तेंदुए ने तीन शावकों को जन्म दिया है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर जोन में हुई यह घटना बताती है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नियमों की अवहेलना हो रही है। । यह जानकारी भी सामने आ रही है कि रिसोर्ट के अंदर मादा तेंदुए ने दो-तीन दिन पहले शावकों को जन्म दिया था, लेकिन इसकी जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को गुरुवार को मिल पाई। इसके बाद हाथी दल को वहां भेजा गया और हाथी दल ने भी शावकों को देखने की पुष्टि कर दी। बताया जा रहा है कि रिसोर्ट के पिछले हिस्से में काफी ऊंची-ऊंची घास है और इस घास के बीच में खंडहर नुमा बाथरूम बना हुआ है, जो पूरी तरह से उपयोगहीन है। इसी बाथरूम के अंदर मादा तेंदुए ने तीन शावकों को जन्म दिया है।कोर एरिया के निकट निर्माण नहीं करने का नियम वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत बनाया गया है। कोर एरिया से एक किलोमीटर की दूरी पर भी निर्माण वर्जित किया गया है। जबकि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कोर क्षेत्र से सटकर सैकड़ों निर्माण हो चुके हैं और अभी भी हो रहे हैं। दरअसल बाघ संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी इस दिशा में ध्यान नहीं दे रहे, जिसके कारण निर्माण करने वाले बेखौफ होकर जंगल से लगकर निर्माण कर रहे हैं।जानकारी मिली है कि जंगल में बना मंथरा नाम का यह रिसोर्ट कोर एरिया से लगा हुआ है, जिसके कारण यहां आस-पास जंगली जानवरों का आना-जाना बना रहता है। यह रिसोर्ट काफी छोटा है और अक्सर खाली पड़ा रहता है। सीजन के दिनों में कभी कभार यहां पर्यटक आते हैं। यही कारण है कि इस रिसोर्ट की देखभाल भी कम होती है। जंगल से लगे होने के कारण रिसोर्ट का पिछला हिस्सा जंगली झाड़ियों और घास से भरा हुआ है यही वजह है कि मादा तेंदुए को यहां जंगल जैसा भ्रम हुआ और उसने यहीं शावकों को जन्म दे दिया।










































