जिले सहित संपूर्ण देश में शुक्रवार को पवित्र माह रमजान का पहला रोजा रखा गया। जहां मुस्लिम धर्मावलंबियों द्वारा भोर सुबह उठकर सहरी की गई। वहीं दिनभर निर्जल रोजा रख एक अल्लाह की इबादते की गई। जिसके बाद शाम को पूर्व तय किए गए वक्त के मुताबिक विभिन्न मस्जिदों ,मदरसों व अन्य इबादतगाहो में सामूहिक रूप से रोजा इफ्तार कार्यक्रम का आयोजन किया गया।जहा रोजेदारों ने सामुहिक रूप से रोजा इफ्तार कर सामूहिक दुवाएं माँगी, वही विभिन्न इबादगाहो में सामूहिक रूप से नमाजे अदा कर रमजान शरीफ का पहला रोजा मुकम्मल किया गया।
रोजा इफ्तार में उमड़ा जनसैलाब
रमजान शरीफ पहले रोजी में रोजा इफ्तार के लिए जनसैलाब उमड़ा ने कराया जहां नगर की जामा मस्जिद जामिया नूरिया मदरसा सहित अन्य मस्जिदों में रोजेदारों की काफी भीड़ नजर आई जहां शाम करीब 6:30 रोजेदारों ने सामूहिक रूप से रोजा इफ्तार कर सामूहिक दुआएं मांगी जहां हर जगह छोटे बच्चों की सबसे ज्यादा भीड़ दिखाई दी।
दिल और सोच पर काबू रखना सिखाता रोजा
रमजान के महीने में रोजा रखने का मतलब सिर्फ भूखे प्यासे रहना ही नहीं है बल्कि यह महीना रोजेदारों को अपने दिल और सोच पर काबू रखना भी सिखाता है।रोजेदारों से ऐसी उम्मीद की जाती है कि रमजान के इस पाक महीने में वे अपने अंदर किसी भी तरह का बुरा ख्याल नही लाएंगे और खुद भी तमाम तरह की बुराइयों से दूर रहेंगे।वही खुद भूखे प्यासे रहकर औरो की भूख प्यास की शिद्दत को महसूस करेंगे।ये वही महीना है जिसमे रोजदार अपने अंदर की सभी नकारात्मक भावनाओं को त्याग देते हैं और रोजा रख पूरे महा को एक अल्लाह की इबादत में गुजारते हैं और एक महा बाद रोजे के ईनाम के रूप में ईद का पर्व मनाया जाता है।
13 घण्टो से अधिक समय का हो रहा निर्जल रोजा
गुरुवार शाम को रमजान शरीफ का चांद नजर आते ही मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में एक बार फिर रौनक लौट आई है। वही शुक्रवार को पहले रोजे के दिन रात्रि करीब 3 बजे से मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में खासी रौनक के देखने को मिली। जहां बड़े, बूढ़े बच्चे सहित अन्य महिलाएं एक दुसरे को सहरी की लज्जतें तक्सीम करती नजर आई। जहां जिला मुख्यालय सहित अन्य ग्रामीणो की विभिन्न मस्जिदों मदरसों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। ज्ञात हो कि मुस्लिम धर्मावलंबियों द्वारा रमजान शरीफ के एक माह तक इसी गर्मी में रोजाना लगभग 13 घंटे से अधिक समय का निर्जल रोजा रखा जाएगा। वही एक महा तक विशेष इबादते की जाएंगी जिसके बाद ईद का त्यौहार मनाया जाएगा।
सिर्फ भूखे रहने का नाम रोजा नहीं है- काजी
चर्चा के दौरान शहर काजी अब्दुल हबीब नूरी ने बताया कि रोजा सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है। बल्कि हर बुराई से रुकने का नाम भी रोजा है। गलत ना देखें, गलत ना सुने, जुबान से गलत ना बोले, बुरे कामों से बचते रहे। यदि कोई ऐसा करता है तभी उसका रोजा मुकम्मल होता है। यह महीना अमन, सुकून, शांति और भाईचारे का महीना है। अपनी कौम के गरीबों, यतीमो, बेवाओ का ख्याल रखने का महीना है। अपनी खुशी में गरीबों, मिस्किनो को भी शामिल करना चाहिए। आज पहला रोजा मुकम्मल हुआ है। वही मदरसे सहित अन्य मस्जिदों में रोजाना तराबियो का दौर जारी है। इसी तरह एक महीना पूरा मुकम्मल कर, एक महा बाद ईद का पर्व मनाया जाएगा।










































