मोहगांव पंचायत की वित्तीय अनियमितता का मामला फिर चर्चा में, बिंदुवार जांच रिपोर्ट का इंतजार

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ग्राम पंचायत मोहगांव में वित्तीय अनियमितता से जुड़ा एक पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। शिकायतकर्ता द्वारा इस मामले की शिकायत वर्ष 2008-09 में की गई थी, लेकिन इतने वर्षों बाद भी जांच पूरी तरह से निष्पक्ष और बिंदुवार नहीं हो सकी है। हालांकि कुछ बार जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, लेकिन उसमें सभी तथ्यों को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया। जानकारी के अनुसार इस दौरान कई प्रशासनिक अधिकारी आए और गए, लेकिन किसी के द्वारा भी मामले की अंतिम और स्पष्ट जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। हाल ही में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपने अधीनस्थ अधिकारियों को कई बार जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं। बताया जाता है कि पिछले कुछ महीनों में सीईओ द्वारा करीब आठ बार जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद जांच समिति के सदस्यों द्वारा अभी तक सही तथ्यों और बिंदुओं के आधार पर जांच कर रिपोर्ट जिला पंचायत सीईओ को प्रस्तुत नहीं की गई है।

लालबर्रा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मोहगांव से जुड़ा वित्तीय अनियमितता का एक पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। शिकायतकर्ता लोचनसिंह देशमुख ने वर्ष 2008-09 में तत्कालीन सरपंच वीरेंद्र बिसेन और सचिव भगतराम तुलसीकर पर शासकीय कार्यों में लगभग दो लाख रुपये की अनियमितता करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। बताया जाता है कि यह शिकायत वर्ष 2008-09 में तहसीलदार से लेकर एसडीएम, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और कलेक्टर तक पहुंचाई गई थी। वर्षों के दौरान इस मामले की जांच कई प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की गई, जिसमें कुछ अधिकारियों ने शिकायत को सही पाया तो कुछ ने इसे निराधार बताया। बाद में यह मामला जबलपुर संभाग के कमिश्नर तक पहुंचा, जहां से भी मामले की सत्यता की जांच कर बिंदुवार रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। इसके बावजूद लंबे समय तक मामले में स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आ सकी। वर्ष 2022 में तत्कालीन कमिश्नर बी. चंद्रशेखर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ को शिकायत की बिंदुवार जांच कराने के निर्देश दिए। इसके बाद सीईओ द्वारा विभागीय अधिकारियों की एक जांच समिति गठित कर जांच के निर्देश दिए गए। हालांकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2024 के बाद भी जांच समिति द्वारा अब तक बिंदुवार जांच कर रिपोर्ट जिला पंचायत सीईओ को प्रस्तुत नहीं की गई है। उनका कहना है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा कई बार जांच समिति को जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए। शिकायतकर्ता के अनुसार सीईओ द्वारा करीब सात से आठ बार जांच समिति को बिंदुवार जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक तथ्यों के आधार पर स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। बताया जाता है कि जांच रिपोर्ट स्पष्ट न होने के कारण न तो शिकायतकर्ता लोचनसिंह देशमुख संतुष्ट हैं और न ही जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ इस जांच से संतुष्ट बताए जा रहे हैं। इसी कारण उन्होंने जांच समिति को बार-बार सभी तथ्यों और निर्धारित बिंदुओं के आधार पर पुनः जांच करने के निर्देश दिए हैं। जांच समिति के कुछ सदस्यों का कहना है कि उनके द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई है, लेकिन मुख्य कार्यपालन अधिकारी का कहना है कि जिन बिंदुओं के आधार पर जांच होनी थी, उन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जांच नहीं की गई है। इधर शिकायतकर्ता लोचनसिंह देशमुख ने जांच समिति के कुछ सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मामले की जांच में अनावश्यक देरी की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में जल्द निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई नहीं की गई तो वे इस मुद्दे को और उच्च स्तर के अधिकारियों तक ले जाएंगे। उन्होंने जाँच समिति के सदस्यों पर यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में कई बार मामले को दबाने के लिए कथित रूप से लेनदेन और लीपापोती करने का भी प्रयास किया गया है लेकिन मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने के कारण इसे दबाया नहीं जा सका है ।

रिपोर्ट सीईओ को प्रेषित कर दी गई है – विकास रघुवंशी

जांच समिति के सदस्य एवं जिला पंचायत बालाघाट के परियोजना अधिकारी विकास रघुवंशी ने दूरभाष पर जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले की जांच रिपोर्ट वे पूर्व में दो बार जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ को सौंप चुके हैं। उनके अनुसार लगभग दो माह पहले पहली जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, जबकि एक सप्ताह पूर्व भी पुनः जांच कर रिपोर्ट सीईओ को प्रेषित कर दी गई है। हालांकि उन्होंने जांच के बिंदुओं को मीडिया के साथ साझा नहीं किया, लेकिन उनका कहना है कि पूरी जांच रिपोर्ट जिला पंचायत सीईओ को भेजी जा चुकी है।

जांच समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है – अभिषेक सराफ

जब इस पूरे मामले को लेकर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि मामले में वे शीघ्र संज्ञान लेंगे। उनका कहना था कि यदि जांच समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है तो संबंधित अधिकारियों को रिमाइंडर भेजा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि रिमाइंडर भेजने और रिपोर्ट प्राप्त होने से पहले वे इस विषय में अभी कोई टिप्पणी करना उचित नहीं समझते। एक बार वह इस पूरे मामले को पता कर लेते हैं और आखिर क्यों रिपोर्ट नहीं दी गई इसकी जानकारी लेकर ही इस मामले में जानकारी दे पाएंगे, कि आखिर क्यों जाँच समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश नहीं की है ।

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