स्व सहायता समूह से जुड़ी रसोईया बहनों की समस्याओं को लेकर स्व सहायता समूह रसोईया संगठन द्वारा एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया, जिसमें रसोईया संघ से जुड़े पदाधिकारियों द्वारा रसोईया बहनों को उनके हक अधिकार दिलाने जमकर आवाज बुलंद की गई। स्व सहायता समूह रसोईया संघ द्वारा सोमवार को जिला पंचायत के सामने बैठकर एक दिवसीय धरना कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें सैकड़ों की संख्या में रसोईया बहने मौजूद रही। धरना कार्यक्रम के बाद रसोईया बहनों द्वारा धरनास्थल से रैली निकाली गई, जो कालीपुतली चौक अंबेडकर चौक होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे जहां उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम विभिन्न मांगों का ज्ञापन सौंपा।
स्व सहायता समूह रसोईया संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि रसोईया बहने विगत कई वर्षों से आंगनबाड़ी एवं स्कूलों में मध्यान्ह भोजन के कार्य का संचालन कर रही है लेकिन उन्हें नहीं के बराबर मेहनताना दिया जा रहा है। मध्यान भोजन के कार्य के अलावा स्कूलों में बहुत से कार्य कराए जाते हैं लेकिन उन्हें मानदेय सिर्फ 500 रुपये दिया जा रहा है जो वर्तमान समय में बहुत ही कम है। यहीं नहीं रसोइया बहनों को पिछले 6 माह से मानदेय तक नहीं मिला है जिसके कारण समस्त रसोईया बहने बेहद परेशान हैं, उन्हें जीवन निर्वाह करने भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मानदेय नहीं मिलने से आगामी दीपावली पर्व कैसे मनाए यह समस्या उनके सामने खड़ी हो गई है और मानदेय जल्द दिए जाने तथा सरकार द्वारा उनका जो शोषण किया जा रहा है वह रोके जाने की मांग को लेकर अपनी आवाज उनके द्वारा सरकार तक पहुंचाई जा रही है।
स्व सहायता समूह रसोईया संघ की प्रदेश अध्यक्ष लीना नगपुरे ने बताया कि उन्हें एक दिवसीय धरना प्रदर्शन करना इसलिए पड़ा क्योंकि रसोईया बहनों को 6 माह से मानदेय नहीं मिला है। चाहे आंगनबाड़ी में कार्य करने वाली रसोईया हो या स्कूल में कार्य करने वाले इन्हें नवरात्र पर्व में भी मानदेय नहीं मिला और अब दीपावली पर्व भी वैसे ही जा रहा है। उन्होंने बताया कि 2 करोड़ रुपए बालाघाट जिले में पोषण आहार के आए थे जो कमीशन बाजी के चक्कर में वापस चले गए। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी सुपरवाइजर द्वारा शायद कमीशन की डिमांड की जाती होंगी इसी कारण से पोषण आहर की राशि वापस चले गई, वहीं दूसरी ओर रसोईया बहने 6 माह से मानदेय के लिए परेशान हो रही है।
वही धरना कार्यक्रम में मौजूद भारतीय मजदूर संघ के विभाग प्रमुख राजेश वर्मा ने बताया कि धरना प्रदर्शन के माध्यम से स्व सहायता समूह रसोईया बहनों की समस्याओं की ओर मध्यप्रदेश शासन का ध्यान आकृष्ट कराने का प्रयास किया जा रहा है। रसोईया बहनों का मध्यप्रदेश शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा शोषण किया जा रहा है, उनसे स्कूल के सारे काम कराए जाते हैं साफ सफाई तक कार्य कराया जाता है लेकिन इन्हें मानदेय सिर्फ 500 रुपये दिया जाता है। स्व सहायता समूह रसोईया संघ के नाम से करोड़ों रुपए आते हैं लेकिन उन रुपयों का बीच में ही दुरुपयोग हो रहा है, रसोईया बहनों को सामाजिक पेंशन के दायरे में लाया जाए और इन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए यह सरकार से मांग है।










































