रामनवमी को हुआ था रामलला का जन्म, रामनवमी से ही लिखी गई थी रामचरित मानस

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मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में रामनवमी मनाई जाती है जो कि भगवान विष्णु के 7वें अवतार थे। प्रत्येक साल हिन्दू कैंलेडर के अनुसार चैत्र मास की नवमी तिथि को श्रीराम नवमी के रूप मनाया जाता है। पौराणीक मान्यता अनुसार राम नंवमी के दिन ही प्रभु श्रीराम ने राजा दसरथ के घर जन्म लिया था। भगवान राम को भगवान विष्णु का अंश माना जाता है। यही मुख्य कारण है। कि चैत्र नवरात्रि के नंवमी तिथि को राम नवमी भी कहा जाता है। श्रीराम का जन्म दिवस दुनिया भर में सभी राम भक्त बड़े ही हर्सोल्लास के साथ मानते है। इस दिन रामरक्षा स्त्रोत व रामायण का पाठ करना चाहिए।

रामनवमी से ही लिखा गया था रामचरितमानस

राम नवमी के दिन ही गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस को लिखना शुरू किया था। इसे ‘तुलसी रामायण’ या ‘तुलसीकृत रामायण’ भी कहा जाता है। रामचरितमानस को लिखने में तुलसीदासजी को 2 साल 7 माह 26 दिन का समय लगा था और उन्होंने इसे संवत् 1633 के मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष में राम विवाह के दिन पूरा किया था। इसमें सात काण्ड है। बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड (युद्धकाण्ड) और उत्तरकाण्ड।

रामनवमी पूजा मुहूर्त

राम नवमी पूजा का शुभ मुहूर्त 11:06 से लेकर 01:38 तक रहेगा। जिसकी अवधि लगभग 2 घंटे 33 मिनट रहेगी। नवमी तिथि 10 अप्रैल, रविवार को सुबह 01:32 से शुरु होकर 11 अप्रैल, सोमवार को रात्रि 03:15 पर समाप्त होगी।

रामनवमी पूजा विधि

रामनवमी के दिन श्रीराम की पूजा राम मंदिर या घर पर भी की जा सकती है। जिस भी स्थान पर आप पूजा कर रहें हो वहां श्रीराम की प्रतिमा, मूर्ति या फिर तस्वीर होना आवश्यक है। पूजा से पहले गंगा जल से प्रभु राम का ​अभिषेक करें। जिसके बाद भगवान को अक्षत्, रोली, चंदन, धूप, आदि से पूजन कर तुलसी के पत्ते व कमल का फूल अर्पित करें। साथ ही मौसमी फल और मिष्ठान से भोग लगाएं। पूजा का समापन आरती कर करें। इस दिन रामचरितमानस, रामायण और रामरक्षास्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए।

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