जनता का पैसा बर्बाद करना किसे कहते हैं यह कोई नगरपालिका से सीखे,कि आए दिनों नगर पालिका जनता के लाखों रुपए का टैक्स बर्बाद करने पर तुली हुई है.यह बात हम नहीं कह रहे हैं बल्कि यह बात खुद नगर पालिका में चल रहे कार्य बता रहे हैं. जहां कोई काम मुकम्मल किए बगैर ही एक डेढ़ घंटे के भीतर लाखों रुपए पानी की तरह बहाए दिए गए.जिसका एक नजारा शुक्रवार को नगर पालिका में देखने को मिला है.जहां नगर पालिका द्वारा राजस्व शाखा बिल्डिंग की छत पर भारी बरसात में वाटर प्रुफिंग का काम कराया गया.जहाँ लाखों रुपए की लागत खर्च कर कराया गया यह कार्य थोड़ी देर बाद शुरू हुई बारिश में ही बह गया. यानी जिस पानी को रोकने के लिए नगर पालिका द्वारा राजस्व शाखा बिल्डिंग की छत पर लाखों रुपए की वाटर प्रूफिंग कराई गई थी वह चंद देर के पानी में ही पानी पानी हो गई और इस तरह वाटर प्रूफिंग के नाम पर नगर पालिका द्वारा जनता के लाखों रुपए की राशि को एक झटके मे ही बर्बाद कर दिया गया.
तो बरसात के पूर्व क्यों नहीं आया होश
आपको बताएं कि अक्सर बिल्डिंग में वाटर प्रूफिंग का कार्य बरसात के पूर्व कराया जाता है. ताकि बारिश होने पर बिल्डिंग में सीलिंग या छत से पानी टपकने की समस्या ना बने. लेकिन नगर पालिका द्वारा यह कार्य तब कराया जा रहा है जब बरसात लगभग समाप्त सी हो गई है. ऐसे में नगर पालिका प्रबंधन पर अब कई सवाल उठने लगे हैं सवाल यह है कि ज़ब वाटर प्रूफिंग का काम कराना ही था तो नगर पालिका द्वारा इसे बरसात के पूर्व क्यों नहीं कराया गया, सवाल यह भी है कि जब रोजाना बारिश हो रही है उस बारिश के दौरान आनन-फानन में वाटर प्रूफिंग का कार्य कराने क़ी आखिर जरूरत क्यों पड़ गईं.सवाल यह भी है कि यह कार्य आखिर किसकी अनुमति से, किस मद से और अचानक क्यों करा दिया गया.वही सवाल यह भी है कि वाटर प्रुफिंग के नाम पर लाखों रुपए बारिश के दौरान आखिर क्यों खर्च कर दिए गए. और सब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनता का पैसा आखिर कब तक ऐसा ही बर्बाद किया जाएगा.यही सभी सवाल नगरपालिका प्रबंधन के गैर जिम्मेदाराना रवैया को प्रदर्शित करते हैं.
इंजीनियर तक को नहीं है मामले की जानकारी
लाखों रुपए की लागत से वाटर प्रूफिंग कर उसे पानी में बहाने वाले इस मामले में गौर करने वाली बात यह है कि नपा बिल्डिंग में वाटर प्रूफिंग का काम चल रहा है. जबकि इसकी जानकारी नगरपालिका इंजीनियर तक को नहीं है.वाटर प्रुफिंग की अनुमति किसने दी, किस मद से वाटर प्रूफिंग का काम किया गया. कितनी लागत से वाटर प्रूफिंग कराई गई थी और इसका एस्टीमेट किसने और कब बनाया था इसकी तक जानकारी नपा इंजीनियर को नहीं है.इस पूरे मामले को लेकर जब हमने नपा इंजीनियर ज्योति मेश्राम से दूरभाष पर संपर्क किया तो उन्होंने इस मामले में अनभिज्ञता जाहिर करते हुए, इसकी किसी भी प्रकार की जानकारी होने से साफ इंकार कर दिया. उन्होंने बताया क़ी शायद किसी दूसरे इंजिनियर क़ो इसक़ी जानकारी होंगी लेकिन उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है. यह सवाल यह उठता है कि ये आखिर कैसी व्यवस्था है कि एक इंजीनियर तक को नहीं पता कि उनकी खुद की नगर पालिका बिल्डिंग में कब और कौन सा काम कराया जा रहा है और उसका एस्टीमेट क्या है?
कहीं नपा में जमकर तो नहीं चल रही मनमर्जी?
इस पूरे मामले में गौर करने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि नगरपालिका में जिम्मेदारों द्वारा जमकर मनमानी चलाई जा रही है. जिसके मन में जो काम आता है, वह अपने मन से बिना किसी परिषद या किसी सहमति के बिना ही मनमानी तरीके से काम करा रहा है और जनता के टैक्स को मनमानी तरिके से बर्बाद करने में तुला है या कहें कि कहां से कितना और किस नाम पर बिल निकाला जाए, इस पर तुला हुआ है.शायद यही वजह है कि जनता के लाखों रुपए बारिश में पानी में बहाए जा रहे हैं










































