पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। नगर मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएससी) इन दिनों स्वयं बदहाली के दौर से गुजर रहा है। स्वास्थ्य केंद्र में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण समूचे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। आलम यह है कि स्वीकृत पदों की तुलना में आधे कर्मचारी भी कार्यरत नहीं हैं। जिससे मरीजों को समुचित इलाज मिलना तो दूर, सामान्य परामर्श के लिए भी घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इस तरह से लालबर्रा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ३० बिस्तर के अस्पताल में ७७ ग्राम पंचायत क्षेत्र के १०४ गांव के ग्रामीणजनों के स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए ७५ पद स्वीकृत है। जिसमें ८ एमबीबीएस के पद है जिसमें से महज एक एमबीबीएस चिकित्सक डॉ रितु धुर्वे पदस्थ है जिनके द्वारा स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही है। इस तरह से लालबर्रा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सकों की भारी कमी है जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही है।
सुविधाओं का अभाव
आपकों बता दे कि स्वास्थ्य विभाग के मानकों के अनुसार एक ३० बिस्तर वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में २४ घंटे आपातकालीन सेवा, प्रसव सुविधा (लेबर रूम) और माइनर ओटी का होना अनिवार्य है। यहां कम से कम ४ विशेषज्ञ डॉक्टर (फिजिशियन, सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ) की नियुक्ति होनी चाहिए। इसके अलावा मरीजों के लिए आधुनिक एक्स-रे मशीन, पैथोलॉजी लैब और एक सुसज्जित फार्मेसी की सुविधा २४ घंटे उपलब्ध होनी चाहिए। ताकि गरीब मरीजों को बाहर से दवा न खरीदनी पड़े। साथ ही गंभीर मरीजों को रेफर करने के लिए अस्पताल परिसर में एंबुलेंस की उपलब्धता और स्वच्छता के लिए पर्याप्त सफाई कर्मियों का होना भी आवश्यक है। दुर्भाग्यवश लालबर्रा में इन बुनियादी मानकों की धज्जियां उड़ती दिखाई दे रही हैं। इस तरह से लालबर्रा का ३० बिस्तर का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सकों की कमी के साथ ही सुविधाओं का अभाव है।
विशेषज्ञों का टोटा, सहायक स्टाफ की भी कमी
प्राप्त आधिकारिक जानकारी और वर्तमान स्थिति के विश्लेषण से पता चलता है कि स्वास्थ्य केंद्र में विभिन्न श्रेणियों के कुल ७५ पद स्वीकृत हैं। विडंबना यह है कि लालबर्रा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में केवल ४६ कर्मचारी ही वर्तमान में पदस्थ हैं, जबकि २९ महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति विशेषज्ञ डॉक्टरों और तकनीकी सहायकों की है। क्षेत्रीय जनता का कहना है कि एक आदर्श सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एमबीबीएस डॉक्टर, प्रशिक्षित नर्सें, डेंटिस्ट और स्त्री रोग विशेषज्ञ जैसे विशेषज्ञों की पदस्थापना अनिवार्य है। लेकिन लालबर्रा में विशेषज्ञों की कमी तो है ही, साथ ही सहायक कर्मचारियों के रिक्त पदों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। जिसमें नियमित एम.ओ. (पुरुष) व विशेषज्ञ ६ पदों में से केवल १ पद भरा है, ५ पद रिक्त हैं। इसी तरह नर्सिंग ऑफिसर में नियमित १० पदों में से 4 पद खाली पड़े हैं। सहायक ग्रेड (१,२,३), नेत्र सहायक, ड्रेसर, वार्डबॉय और सुरक्षा कर्मियों के पद भी बड़ी संख्या में खाली हैं।
मरीजों की बढ़ती मुसीबतें और जन-आक्रोश
स्वास्थ्य सेवाओं के इस अभाव के कारण स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटी-बड़ी बीमारियों के लिए उन्हें जिला अस्पताल या निजी क्लीनिकों की ओर रूख करना पड़ता है। जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए संभव नहीं है। हमें उम्मीद थी कि मुख्यालय का अस्पताल होने के नाते यहाँ बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन यहां तो स्टाफ ही पूरा नहीं है। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के बिना यह अस्पताल महज एक रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि लालबर्रा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रिक्त पड़े पदों पर तत्काल नियुक्तियां की जाये।
दूरभाष पर चर्चा में बीएमओं डॉ रितु धुर्वे ने बताया कि क्षेत्रीयजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जा रही है किन्तु चिकित्सकों एवं सहायक स्टाप की समस्या से शासन-प्रशासन को अवगत करवा दिया गया है और अपने उच्चाधिकारियों को सूचना दे दी गई है। साथ ही हमारे द्वारा आमजन मानस को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने का पुरा प्रयास किया जा रहा है।









































