शासन प्रशासन द्वारा जहां एक और घुमक्कड़ जाति जनजाति के लोगों के उत्थान के लिए विशेष अभियान चलाने और अति पिछड़ी जाति के लोगों को विशेष आरक्षण देकर उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाए जाने का दावा किया जा रहा है। तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश मे घुमक्कड़ जाति के लोगों को जाति संबंधी किसी भी सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हैरत की बात तो यह है कि विशेष पिछड़े वर्ग में होने के बावजूद भी धक्कड़ जाति को एसटी, एससी ,ओबीसी सहित किसी भी जनजाति में शामिल नहीं किया गया है और घुमक्कड़ जाति के लोग आज भी सामान्य वर्ग में आ रहे हैं। जिन्हें ना तो किसी वर्ग में पहचान दी गई है और ना ही घुमक्कड़ जाति के लोगो को शासकीय नौकरी में आरक्षण दिया जा रहा है। जिससे नाराज समाज के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र की तर्ज पर उनकी घुमक्कड़ जाति को विटीएन्टी जनजाति में शामिल कर महाराष्ट्र की तरह की नौकरी सहित अन्य क्षेत्र में विशेष आरक्षण दिए जाने की मांग की गई है।
मामले को लेकर की गई चर्चा के दौरान घुलर समाज प्रदेश अध्यक्ष ललित गर्दे ने बताया कि सरकार द्वारा उन्हें घुमक्कड़ जाति का प्रमाण पत्र दिया गया है लेकिन उन्हें पिछड़ी जाति में शामिल नहीं किया गया है जिसके चलते अति पिछड़ी जाति के होने के बावजूद भी उन्हें सामान्य वर्ग में मजबूरन शामिल किया जा रहा है
आपको बताएं कि पूरे मध्यप्रदेश में केवल बालाघाट जिला एक ऐसा जिला है जहां घुमक्कड़ जाति के लोग निवास करते हैं जहां परसवाड़ा ,कटंगी ,खैरलांजी और जामखाड़ी सहित अन्य जगहों में जिले में करीब साढे 3 हजार जाति के लोग हैं जिन्हें किसी भी जाति में शामिल नहीं किया गया है।जिससे घुलर समाज काफी नाराज है।










































